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बीकानेर में राजनीति के बीच पिस रही जनता,शहर में गंदगी का अंबार,नेता बयानबाजी में व्यस्त, सफाई व्यवस्था अब भी आधी अधूरी; जनता पूछ रही—आखिर कब निभाएंगे नेता अपना धर्म?

THE BIKANER NEWS:;बीकानेर। शहर में पिछले कुछ महीनों से जारी राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं की आपसी बयानबाजी के बीच आम जनता परेशान नजर आ रही है। एक तरफ जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष करने में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में गंदगी के ढेर लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।


पिछले कई महीनों से घर-घर कचरा संग्रहण करने वाली कंपनी का टेंडर खत्म होने के बाद सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके बाद नए टेंडर के तहत 2 अक्टूबर से घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था शुरू होने की उम्मीद थी। इसी बीच बीकानेर नगर निगम को नए महापौर और उपमहापौर भी मिले। दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों से होने के बावजूद शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर करने पर काम होगा।
लेकिन शहरवासियों की यह उम्मीद भी फिलहाल राजनीति के बीच उलझती दिखाई दे रही है।


2 अक्टूबर को होना था शुभारंभ, कार्यक्रम हुआ स्थगित
2 अक्टूबर को घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले टिपरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाना था। कार्यक्रम में महापौर की मौजूदगी प्रस्तावित थी और विधायक की मौजूदगी में इसकी शुरुआत होनी थी। लेकिन कार्यक्रम स्थगित हो गया।
इसके बाद 3 अक्टूबर को विधायक की मौजूदगी में टिपरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, लेकिन इस कार्यक्रम में महापौर मौजूद नहीं थे। इसके बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया।


कहीं टिपर खड़े हैं, तो कहीं कचरे के ढेर
शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू करने के दावे के बावजूद कई इलाकों में स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। कई जगह कचरे के ढेर लगे हैं और कुछ स्थानों पर टिपर खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नई व्यवस्था का लाभ शहरवासियों तक पूरी तरह कब पहुंचेगा?
एक तरफ नगर निगम और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक रोजाना गंदगी और सफाई की समस्या से जूझ रहा है।


जनता ने वोट देकर अपना फर्ज निभाया, अब नेताओं की बारी
नगर निगम चुनाव में शहर की जनता ने अपने जनप्रतिनिधियों को चुनकर अपना फर्ज निभाया। जनता को उम्मीद थी कि नया बोर्ड बनने के बाद शहर की मूलभूत समस्याओं पर तेजी से काम होगा। लेकिन मौजूदा हालात में आम नागरिक खुद को सवालों के बीच खड़ा पा रहा है।
जनता का सवाल सीधा है—जब वोट मांगने का समय था, तब सभी नेता जनता के बीच थे, लेकिन अब जनता को राहत देने का समय आया तो राजनीति क्यों हावी हो रही है?
बीकानेरवासियों को बयानबाजी नहीं, साफ-सफाई, नियमित कचरा संग्रहण और बेहतर व्यवस्थाएं चाहिए। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन शहर की जनता को गंदगी से राहत दिलाना नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अब देखना यह होगा कि राजनीतिक बयानबाजी और शिकायतों का यह दौर कब खत्म होता है और बीकानेर की सफाई व्यवस्था वास्तव में कब पटरी पर लौटती है।
आखिर जनता ने मतदान करके अपना धर्म निभा दिया है, अब क्या राजनेता भी अपना धर्म निभाकर शहरवासियों को राहत दिलाएंगे?

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