राजनेताओं की सियासी खींचतान में उलझा नगर निगम, कचरे और गंदगी से जूझ रही बीकानेर की जनता,टेंडर की शर्तों पर उठे सवाल,जनता का सवाल!


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। जगह-जगह कचरे के ढेर, चोक पड़ी सीवर लाइनें और ओवरफ्लो नालियों से सड़कों पर फैलता गंदा पानी आमजन की परेशानी बढ़ा रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के दावों के बीच नगर निगम की कार्यशैली और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।


पिछले लंबे समय से शहरवासी बदहाल सफाई व्यवस्था से परेशान हैं। निगम चुनाव नहीं होने के दौरान जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के चलते अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठते रहे। लंबे इंतजार के बाद निगम चुनाव हुए और कांग्रेस का बोर्ड बना तो शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन स्थानीय निकाय में कांग्रेस का बोर्ड और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बीच राजनीतिक खींचतान की चर्चाओं ने विकास और व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावित करने के आरोपों को जन्म दिया है।
कांग्रेस की ओर से कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की ओर से जारी टेंडर की शर्तों और उनके क्रियान्वयन को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
कार्यादेश के एक महीने बाद भी पूरी नहीं हुई संसाधनों की व्यवस्था
नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए नई फर्म को कार्यादेश जारी किए करीब एक महीना हो चुका है। इसके बावजूद निर्धारित संसाधनों की पूरी उपलब्धता नहीं होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि निगम की ओर से फर्म को इस संबंध में दो नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
वाहनों की संख्या में कमी, कई वार्डों में व्यवस्था प्रभावित
नियमानुसार फर्म को जितने संसाधन उपलब्ध कराने थे। इनमें अभी तक आधे ही टिपर और छोटे वाहन सहित निर्धारित वाहन व्यवस्था शामिल उपलब्ध बताई जा रही है । उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौके पर अभी करीब 100-110 टिपर और 20-25 छोटे वाहन ही पहुंचे हैं।
वहीं, कई वार्डों में 88 ट्रैक्टरों की आवश्यकता के मुकाबले महज 65 ट्रैक्टरों से कचरा संग्रहण किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्धारित संसाधनों के बिना सभी वार्डों में नियमित कचरा संग्रहण कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है?
वाहनों के दस्तावेज और चालकों के लाइसेंस पर सवाल
कचरा संग्रहण में लगे कुछ वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, इंश्योरेंस और अन्य वैध दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ वाहन आवश्यक दस्तावेजों के बिना संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा भारी वाहनों के लिए जरूरी ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा भी अहम
कचरा संग्रहण कार्य में लगे चालकों और अन्य कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन नहीं हुआ है तो यह प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से जांच का विषय है। शहर के प्रत्येक वार्ड में घर-घर पहुंचने वाले कर्मचारियों का सत्यापन सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
दो नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
इन तमाम कमियों और आरोपों के बावजूद फर्म के खिलाफ अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट होना बाकी है। नगर निगम और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर कार्यादेश की शर्तें पूरी नहीं होने के बावजूद फर्म को काम जारी रखने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? क्या निगम ने वाहनों के दस्तावेजों और कर्मचारियों के लाइसेंस व पुलिस सत्यापन की जांच करवाई है?
राजनीति अपनी जगह, जनता को राहत कब?
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे की जिम्मेदारी की ओर इशारा करते नजर आते हैं, लेकिन इन सबके बीच आमजन की परेशानी जस की तस बनी हुई है।
दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी शहर के कई इलाकों में गंदगी और कचरे की समस्या सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। शहरवासियों को इस बात से कोई सरोकार नहीं कि निगम में किस पार्टी का बोर्ड है और प्रदेश में किसकी सरकार है। जनता को तो बस साफ-सुथरी सड़कें, नियमित कचरा संग्रहण और सुचारु सफाई व्यवस्था चाहिए।
जनता का सवाल सीधा है—नगर निगम की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? राजनीतिक खींचतान के बीच ठेकेदार की जवाबदेही कौन तय करेगा और बीकानेर की जनता को गंदगी से आखिर कब राहत मिलेगी?




































