बीकानेर: जिस गांधी वाटिका का हुआ था भव्य उद्घाटन, आज गांधी जयंती पर एक फूलमाला को भी तरसी!

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों, आदर्शों और स्मृतियों को जीवंत रखने के उद्देश्य से बीकानेर में जिस ‘गांधी वाटिका’ का बड़े जोर-शोर से लोकार्पण किया गया था, आज वह खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के अवसर पर जब पूरा देश बापू को नमन कर रहा है, तब बीकानेर की इस वाटिका में बापू की प्रतिमा को एक पुष्पमाला तक नसीब नहीं हुई।
जन जागृति युवा संगठन के सयोजक उमेश कुमार चौधरी ने बताया की
भव्य उद्घाटन, फिर भुला दिया
ज्ञात हो कि नगर विकास न्यास (UIT) द्वारा 11 सितंबर 2021 को इस गांधी वाटिका का लोकार्पण किया गया था। उस भव्य समारोह में केंद्रीय मंत्री, विधायक, आला प्रशासनिक अधिकारी और कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे। तब मंच से स्वच्छता, अहिंसा और राष्ट्रसेवा के बड़े-बड़े संकल्प लिए गए थे। यह उम्मीद जताई गई थी कि यह वाटिका आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी और बीकानेर के नागरिक यहाँ आकर राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे। लेकिन आज, 2 अक्टूबर 2026 की तस्वीर एक अलग ही कहानी बयां कर रही है।
चौधरी ने बताया की
वाटिका के प्रवेश द्वार के भीतर सूखी घास, बिखरी गंदगी और रखरखाव का भारी अभाव दिखाई देता है। जिस स्थान पर गांधीजी के विचारों की सुगंध फैलनी चाहिए थी, वहाँ सिर्फ उपेक्षा का वातावरण नजर आता है। जिस महापुरुष ने जीवन भर स्वच्छता का संदेश दिया, उन्हीं की स्मृति में बनी वाटिका में आज एक फूलमाला तक अर्पित होने की प्रतीक्षा दिखाई दे रही है।
यह केवल एक पार्क की बदहाली नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्मारकों के प्रति स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
आज आवश्यकता है कि संबंधित विभाग इस वाटिका की नियमित सफाई, हरियाली, प्रकाश व्यवस्था, प्रतिमा की देखरेख और नियमित पुष्पांजलि की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसे केवल एक बंद परिसर नहीं, बल्कि नागरिकों, विद्यार्थियों और नई पीढ़ी के लिए गांधीवादी विचारों का जीवंत केंद्र बनाया जाए।
गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और स्मृतियों का सम्मान करना है। आज गांधी जयंती पर इस वाटिका की तस्वीर बीकानेर के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, नगर विकास न्यास और प्रशासन से एक सीधा सवाल पूछ रही है— “जिस गांधी वाटिका का कभी बड़े समारोह में लोकार्पण हुआ था, आज उसी वाटिका की सुध लेने वाला कौन है?”





































