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नहरबंदी खात्मे की ओर, लेकिन प्यास से बेहाल जनता: AC कमरों में कैद अधिकारी, टैंकर माफियाओं ने जमकर काटी चांदी

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर: पिछले 45 दिनों से चल रही नहरबंदी अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन शहरवासियों का जल संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ पानी की बूंद-बूंद को तरसती जनता, व्यवस्था की नाकामी की साफ गवाही दे रही है। हालात ये हैं कि आम जन पानी के टैंकरों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर सिर्फ कागजी फरमान जारी कर रहे हैं।

जलदाय विभाग के ‘निःशुल्क टैंकर’ बने छलावा

संकट के इस दौर में जलदाय विभाग द्वारा किए गए निःशुल्क पानी के टैंकरों के दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुए। शहर की प्यासी जनता इन सरकारी टैंकरों को देखने के लिए तरस गई। विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली और लापरवाही का सीधा फायदा निजी टैंकर मालिकों ने उठाया।

सरकार की तय कीमत दरकिनार, मनमाने दामों से लूटी गई जनता

जनता की मजबूरी का फायदा उठाते हुए टैंकर मालिकों ने जमकर चांदी काटी और पानी के मनमाने दाम वसूले। हालांकि, सरकार और प्रशासन ने टैंकरों की दरें तय की थीं, लेकिन धरातल पर इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। हैरानी की बात यह है कि खुलेआम जनता की जेब पर डाका डाल रहे इन टैंकर मालिकों पर प्रशासन द्वारा किसी भी तरह की कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गई, जिससे अधिकारियों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

बूस्टर जब्त करने की बजाय बिजली काटना समझा उचित

पानी के अवैध खिंचाव को रोकने के लिए प्रशासन का रवैया भी बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। नियमानुसार अवैध बूस्टर (पानी खींचने वाली मशीन) जब्त किए जाने चाहिए थे, लेकिन प्रशासन ने इसका ठीकरा आम जनता पर फोड़ते हुए इस भीषण गर्मी में बिजली की कटौती करना ही सबसे आसान और उचित समाधान समझ लिया। इस दोहरी मार से गर्मी से झुलसते लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

नियमित जलापूर्ति का अब भी है इंतजार

नहरबंदी खत्म होने की खबरों के बीच, अब भी शहर की जनता की आंखें सूखे नलों की ओर टकटकी लगाए बैठी हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा और कब आमजन को इस कृत्रिम जल संकट से मुक्ति मिलकर सुचारू जलापूर्ति नसीब होगी।

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