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बीकानेर में सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, नियमित नहीं आ रहीं कचरा संग्रहण गाड़ियां, महीनों से नालियां जाम,जनता पर जुर्माना लगाने की उठी मांग! क्या सिर्फ जनता ही जिम्मेदार है? अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों की नही कोई जिम्मेदारी !

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं। कहीं सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हैं, कहीं नियमित रूप से कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियां नहीं पहुंच रहीं, तो कहीं नालियां लंबे समय से सफाई का इंतजार कर रही हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों से सामने आने वाली ऐसी समस्याओं के बीच अब जनता की जिम्मेदारी और उस पर जुर्माना लगाने की मांग को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नगर निगम अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाने में सफल नहीं हो पा रहा, तो हर बार जनता को ही कटघरे में खड़ा क्यों किया जाता है।क्या शहर की सफाई व्यवस्था केवल आम नागरिकों की जिम्मेदारी है? क्या नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, सफाई का ठेका लेने वाली कंपनियों और ठेकेदारों की कोई जवाबदेही नहीं है?

तीन-चार दिन कचरा नहीं उठे, तो जनता क्या करे?
शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर कुछ पार्षदों का कहना है कि सफाई के लिए हुए टेंडर में कई कमियां हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ियों की कमी है और कई वार्डों में गाड़ियां नियमित रूप से नहीं पहुंचतीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिस घर से प्रतिदिन कचरा निकलता है, वहां रहने वाले लोग आखिर उसे कहां रखें? अगर तीन-चार दिनों तक कचरा उठाने वाली गाड़ी ही नहीं आए, तो क्या लोग अपने घरों में कचरा जमा करके रखें?
घर में कचरा जमा करने से दुर्गंध और गंदगी की समस्या पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, घर के बाहर कचरा डालने पर शहर की सुंदरता और स्वच्छता प्रभावित होती है।
ऐसी स्थिति में आम नागरिक आखिर जाए तो जाए कहां?
जब कचरा उठाने की व्यवस्था नियमित नहीं होगी, तो सड़कों पर कचरा जमा होने की समस्या को केवल जनता की लापरवाही बताकर कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है?


अगर गाड़ियां नियमित रूप से हर वार्ड में पहुंचें, तो जनता को भी कचरा निर्धारित समय पर सौंपने में आसानी होगी। व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी निभाएगी, तो नागरिकों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
जनता पर जुर्माना लगाने की मांग, लेकिन अधिकारियों से सवाल कौन पूछेगा?
कुछ जनप्रतिनिधियों और उनके समर्थकों का कहना है कि शहर को साफ रखने के लिए जनता को भी जिम्मेदार बनना होगा। एक पार्षद प्रतिनिधि की ओर से तो जनता पर जुर्माना लगाने की मांग भी की गई है।
यह सही है कि शहर को गंदा करना उचित नहीं है। नागरिकों को भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने से बचना चाहिए और सफाई व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए।
लेकिन यहां एक सवाल और है।
अगर जनता पर जुर्माना लगाया जा सकता है, तो नियमित सफाई नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही क्यों नहीं तय होनी चाहिए?
अगर कोई नागरिक जानबूझकर सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि किसी वार्ड में कचरा संग्रहण की गाड़ी ही नहीं पहुंच रही, तो वहां की समस्या का समाधान कौन करेगा?
क्या बिना नियमित कचरा संग्रहण सुनिश्चित किए केवल जुर्माने की बात करना उचित होगा?
नियम सबके लिए होने चाहिए और जवाबदेही भी सभी की तय होनी चाहिए। जनता की गलती पर कार्रवाई हो, तो सरकारी व्यवस्था की लापरवाही पर भी सवाल उठने चाहिए।
नालियों में उग आए पौधे, क्या इसके लिए भी जनता जिम्मेदार है?
अब बात केवल सड़कों पर पड़े कचरे की नहीं, बल्कि शहर की नालियों की भी है।
बीकानेर के कई इलाकों में नालियों की सफाई नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ स्थानों पर नालियों में पौधे उगने की स्थिति बन गई है, तो कहीं गंदगी जमा होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित होती है। कई जगह नालियां गंदगी से ढकी होने के कारण दिखाई तक नहीं देतीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि नालियों की नियमित सफाई करना किसकी जिम्मेदारी है?
क्या आम नागरिक नालियों की सफाई करवाने के लिए जिम्मेदार है या नगर निगम का संबंधित विभाग इसके लिए जवाबदेह है?
चौक सीवरेज और नालियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी आवश्यक है। जब जल निकासी की व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं होगी, तो शहर में स्वच्छता बनाए रखने के दावे कितने प्रभावी साबित होंगे?
कचरा उठाना, नालियां साफ करना और सीवरेज व्यवस्था को सुचारु रखना नगर निगम की जिम्मेदारियों में शामिल है। इन कार्यों में लापरवाही होने पर जवाबदेही तय होना भी जरूरी है।
टेंडर में कमी है, तो जिम्मेदार कौन?
कुछ पार्षद सफाई व्यवस्था से जुड़े टेंडर में कमियां होने की बात कह रहे हैं। यदि वास्तव में टेंडर की शर्तों, संसाधनों या कार्यप्रणाली में ऐसी कमियां हैं, जिनसे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, तो उनकी समीक्षा होनी चाहिए।
नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सफाई व्यवस्था के लिए कितनी गाड़ियां निर्धारित हैं, कितनी नियमित रूप से संचालित हो रही हैं और प्रत्येक वार्ड में कचरा संग्रहण की क्या व्यवस्था है।
इसके साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि संबंधित कंपनियां और ठेकेदार निर्धारित शर्तों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं।
यदि संसाधनों की कमी है, तो उसका समाधान किया जाए। यदि ठेकेदार की लापरवाही है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो। यदि निगरानी में कमी है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाए।
आखिर जनता को यह जानने का अधिकार है कि सफाई व्यवस्था पर खर्च होने वाले संसाधनों के बावजूद शहर में जगह-जगह गंदगी की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं।
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल बयान देना नहीं
जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और उनका समाधान करवाने के लिए चुने जाते हैं। ऐसे में उनकी भूमिका केवल जनता को जिम्मेदार ठहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्हें अपने वार्डों में सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की निगरानी करनी चाहिए। जहां गाड़ियां नियमित नहीं पहुंचतीं, वहां संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगना चाहिए। जहां नालियां साफ नहीं होतीं, वहां सफाई सुनिश्चित करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
यदि किसी वार्ड में लगातार सफाई की समस्या बनी हुई है, तो उसका समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए।
जनता को भाषण नहीं, समाधान चाहिए। आश्वासन नहीं, नियमित सफाई चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप नहीं, जवाबदेही चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की असली परीक्षा सोशल मीडिया पर बयान देने में नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करवाने में होती है।
जनता भी जिम्मेदार बने, लेकिन नगर निगम भी जवाब दे
इस पूरे मामले में जनता की जिम्मेदारी को नकारा नहीं जा सकता। नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकना चाहिए, निर्धारित स्थानों का उपयोग करना चाहिए और शहर को साफ रखने में सहयोग देना चाहिए।
लेकिन जनता की जिम्मेदारी का अर्थ यह नहीं है कि नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाए।
सफाई एक साझा जिम्मेदारी है, लेकिन हर पक्ष की भूमिका अलग-अलग है। जनता को स्वच्छता के नियमों का पालन करना है, जबकि नगर निगम को नियमित कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई, सीवरेज व्यवस्था और कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है।
ठेकेदारों को निर्धारित शर्तों के अनुसार काम करना है और अधिकारियों को निगरानी रखनी है। जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करने हैं।
जब सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी शहर की सफाई व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव होगा।

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