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​बड़ी खबर:-पूनरासर हनुमानजी मंदिर नवनिर्माण विवाद को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला!

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर/श्रीडूंगरगढ़। लाखों भक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र पूनरासर हनुमानजी मंदिर के नवनिर्माण को लेकर चल रहे विवाद में श्रीडूंगरगढ़ एसीजेएम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मंदिर के वंशानुगत पुजारी परिवार द्वारा दायर वाद पर सुनवाई करते हुए ‘कोलकाता ट्रस्ट’ द्वारा शुरू किए गए निर्माण कार्य को अवैध मानते हुए उस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पक्के नवनिर्माण और सारभूत परिवर्तन पर रोक लगाते हुए ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

मंदिर के वंशानुगत पुजारी परिवार ने न्यायालय में वाद दायर कर आरोप लगाया था कि 20 मार्च 2026 को राजनीतिक रसूख के चलते कोलकाता ट्रस्ट द्वारा मंदिर प्रांगण में जबरन शिला पूजन किया गया। वादी पक्ष के अधिवक्ता बाबूलाल झेड़ू ने कोर्ट में तर्क दिया कि 300 वर्ष पूर्व जयरामदास बोथरा द्वारा मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद से ही वंशानुगत रूप से बोथरा परिवार के पुजारी ही मंदिर की सेवा-पूजा और निर्माण कार्य करवाते आए हैं।

​पुजारी परिवार ने बताया कि 1981 में मंदिर की 13876 वर्गगज भूमि का पट्टा भी पुजारियों को ही जारी किया गया था और 2004 में प्रबंधन के लिए ‘श्री पूनरासर हनुमानजी पुजारी ट्रस्ट’ बनाया गया था। आरोप है कि प्रतिवादियों ने एक अपंजीकृत और अवैध ट्रस्ट डीड बनाकर बिना किसी अधिकार के जबरन निर्माण का प्रयास किया।

कोलकाता ट्रस्ट के इन लोगों को बनाया गया प्रतिवादी

पुजारी परिवार ने अपने वाद में ‘श्री पूनरासर हनुमानजी ट्रस्ट कोलकाता’ एवं उसके अध्यक्ष भीखमचंद पुगलिया, मनोज जैन, रामरतन मल, जुगराज सिरोहिया, महावीर प्रताप दुग्गड़, भरत कुमार नाहटा, बालचंद दुग्गड़, भीखमचंद डोसी, हंसराज बांठिया, धनपत नाहटा, संजय नाहटा, सुमेरमल सुराणा सहित बीकानेर निवासी सम्पत पारीक, मोटूमल हर्ष और पूनरासर निवासी बजरंगलाल सारस्वत को प्रतिवादी बनाया है। इन सभी को कोर्ट ने पाबंद किया है।

न्यायालय ने क्या कहा?

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादीगण सामान्य भक्तजन की तरह मंदिर में दर्शन करने के अधिकारी हैं। वे मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग (चंदा) दे सकते हैं, लेकिन मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

नोट: न्यायालय ने केवल मंदिर परिसर के भीतर निर्माण पर रोक लगाई है, जबकि पास के बाड़े में पत्थर तराशने के कार्य पर कोई रोक नहीं है। नवनिर्माण का सपना देख रहे श्रद्धालुओं को अब और इंतजार करना पड़ेगा।

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