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नहरबंदी के अंतिम दिनों में टैंकर माफिया की खुली लूट, ‘फ्री’ पानी के टेंकर आमजन की पहुच से दूर

THE BIKANER NEWS:/बीकानेर:^​नहरबंदी खत्म होने के साथ ही आम जनता को अब एक-दो दिन में जलापूर्ति नियमित होने की उम्मीद बंध गई है। लेकिन राहत मिलने से पहले के ये दो-चार दिन शहरवासियों को काफी महंगे पड़ रहे हैं। भीषण गर्मी और पानी की किल्लत का सीधा फायदा उठाते हुए टैंकर माफियाओं ने अंतिम दिनों में पानी के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। आलम यह है कि प्रशासन की ‘निःशुल्क’ टैंकर व्यवस्था आमजन से कोसो दूर साबित हो रही है,

​निजी टैंकर संचालकों की मनमानी, प्रशासन के तय भाव हवा में
जब नलों से पानी गायब है, तब जनता अपनी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर है। टैंकर माफियाओं ने इसी मजबूरी को अवसर में बदल लिया है। कुछ दिन पहले तक जो टैंकर 1000 से 1200 रुपये में मिल जाता था, अब उसके लिए लोगों को 1300 से 1500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। सरकार और प्रशासन द्वारा पानी के जो भाव तय किए गए थे, उनकी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोग अपनी जरूरत के आगे बेबस हैं और मुंह मांगे दाम देने को मजबूर हैं।

प्रशासन ने जनता को राहत देने के लिए निःशुल्क टैंकरों की व्यवस्था की घोषणा जरूर की है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कंट्रोल रूम में नंबर लिखवाने के बाद सरकारी टैंकर को मोहल्ले तक पहुंचने में ही दो से तीन दिन का समय लग रहा है।

​त्रस्त जनता, बेपरवाह सिस्टम
जल संकट से बेहाल जनता अब दोहरी मार झेल रही है। बिना पानी के भीषण गर्मी में गुजारा संभव नहीं है। ऐसे में लोग या तो निजी टैंकरों की मनमानी दरें चुकाएं या फिर सरकारी व्यवस्था के फ्री टेंकरो का इंतजार करे

​सवाल यह उठता है: क्या प्रशासन को इन टैंकर माफियाओं के खेल की जानकारी नही है? या फिर नियमित सप्लाई शुरू होने तक जनता को यूं ही लुटने के लिए छोड़ दिया जाएगा? इस पूरी नहरबंदी के दौरान एक भी अवैध वसूली के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हुई

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