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नौतपा इस दिन से शुरू, बरसेगी आग,जानें मौसम के साथ ज्योतिषीय कारण, प्रभाव और बचाव

THE BIKANER NEWS:^जयपुर:-भारत में मई-जून की तपती दोपहरों के बीच ‘असली गर्मी’ का एहसास कराने वाला समय यानी ‘नौतपा’ जल्द ही शुरू होने वाला है। साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। इन 9 दिनों में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जिससे धरती पर गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है।

​ज्योतिष, प्रकृति और मौसम विज्ञान के अनुसार इन नौ दिनों का विशेष महत्व माना जाता है।

क्यों बढ़ती है धरती की तपिश?

​वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में रोहिणी को चौथा नक्षत्र माना गया है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं (जो शीतलता और जल तत्व के कारक हैं)। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो वह प्रकृति के जल तत्व को तेजी से सोखने लगता है। धरती की नमी कम होने लगती है और गर्म हवाएं वातावरण को भयंकर रूप से तपा देती हैं। इसी कारण इसे नौ दिनों की तीखी तपन यानी ‘नौतपा’ कहा जाता है।

मौसम विज्ञान का नजरिया: धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मई के अंतिम और जून के शुरुआती दिनों में उत्तर भारत में सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं। इससे तापमान तेजी से बढ़ता है और राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में ‘लू’ (Heatwave) का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है।

अच्छे मानसून का संकेत

​ग्रामीण इलाकों और किसानों के बीच एक पुरानी कहावत प्रचलित है कि “अगर नौतपा अच्छे से तप जाए, तो मानसून बेहतर रहने की संभावना बढ़ती है।” इसलिए इसे मौसम के एक सकारात्मक संकेत के रूप में भी देखा जाता है।

नौतपा के चार चरण और ग्रहों का प्रभाव

​ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के चार चरण होते हैं, जिनका संबंध अलग-अलग ग्रहों से है और यह लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं:

  • पहला चरण (मंगल का प्रभाव): आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ती है। नौकरी में तरक्की और नई जिम्मेदारी के योग बनते हैं। राजनीति और प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहता है।
  • दूसरा चरण (शुक्र का प्रभाव): यह समय प्रेम, कला और सुख-सुविधाओं से जुड़ा माना जाता है। फैशन, डिजाइन, संगीत और क्रिएटिव फील्ड वालों के लिए लाभदायक रहता है।
  • तीसरा चरण (बुध का प्रभाव): विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह चरण खास है। पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और बिजनेस में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में समझदारी से लिए गए फैसले लाभ देते हैं।
  • चौथा चरण (चंद्रमा का प्रभाव): इस चरण में परिवार और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों में सुधार देखने को मिल सकता है।

नौतपा के दौरान क्या करें? (धार्मिक मान्यताएं)

​इन 9 दिनों में पूजा, दान और सूर्य साधना का विशेष महत्व है:

  • ​सुबह तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करना फलदायी माना गया है।
  • ​गरीबों को पानी और शीतल चीजें दान करना पुण्यकारी होता है।
  • ​कई लोग इस दौरान छाया दान, जल सेवा और पक्षियों के लिए पानी रखने जैसे कार्य भी करते हैं। मान्यता है कि इससे ‘सूर्य दोष’ कम होता है।

स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान

​नौतपा के दौरान तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • ​दोपहर में तेज धूप से बचें।
  • ​ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लें।
  • ​खाली पेट बाहर न निकलें।
  • ​बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
  • ​हल्के और सूती कपड़े पहनें।

तपकर मजबूत बनने का संदेश

​नौतपा सिर्फ गर्मी का नाम नहीं है। भारतीय परंपरा में यह प्रकृति, मौसम और ज्योतिष के मेल का ऐसा समय माना जाता है, जो इंसान को तपकर मजबूत बनने का संदेश भी देता है। इन 9 दिनों में जहां एक तरफ सूरज अपनी पूरी ताकत दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ लोग पूजा, दान और आत्मचिंतन के जरिए सकारात्मक ऊर्जा पाने की कोशिश करते हैं।

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