बीकानेर में कचरा संग्रहण के टिपर टेंडर पर सियासत तेज,महापौर की उपेक्षा का कांग्रेस पार्षद ने जताया विरोध

THE BIKANER NEWS:- बीकानेर। नगर निगम में कचरा संग्रहण के लिए लगाए जाने वाले टिपर वाहनों को लेकर महापौर अनिल कल्ला के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और निगम चुनाव में भाजपा के महापौर प्रत्याशी रहे डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने महापौर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि महापौर द्वारा झंडी नहीं दिखाने से भजनलाल सरकार के विकास कार्य रुकने वाले नहीं हैं।
डॉ. शेखावत ने कहा कि किसी कंपनी के काम शुरू करने से पहले ही उस पर सवाल उठाना विरोध के लिए विरोध जैसा है। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी पहले से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का काम कर रही है और ऐसे समय में जब शहर करीब एक महीने से कचरे की समस्या से जूझ रहा है, कचरा संग्रहण व्यवस्था पर आपत्ति करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर की रुचि विकास कार्यों के बजाय दूसरी चीजों में अधिक नजर आ रही है।
महापौर की उपेक्षा का कांग्रेस पार्षदों ने जताया विरोध
दूसरी ओर, कचरा संग्रहण टिपर वाहनों की रवानगी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने महापौर की कथित उपेक्षा पर नाराजगी जताई। पार्षद मनोज विश्नोई ने आरोप लगाया कि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले कचरा संग्रहण कार्यक्रम को अचानक स्थगित कर शनिवार को बिना महापौर की मौजूदगी के रवानगी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विश्नोई ने कहा कि एक तरफ उप महापौर पंकज गहलोत और भाजपा पार्षद शहर के विकास की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर महापौर की उपेक्षा किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि महापौर के काम में बाधा डालकर शहर के विकास को प्रभावित करने का
प्रयास हुआ तो कांग्रेस पार्षद सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।
करोड़ों रुपये के भुगतान पर भी सवाल
कांग्रेस पार्षद मनोज विश्नोई ने कचरा संग्रहण कंपनी को काम शुरू होने से पहले ही करोड़ों रुपये के भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया और इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कंपनी ने काम शुरू नहीं किया था, इसके बावजूद भुगतान किया जाना जांच का विषय है।
इस पूरे विवाद के बीच अब टिपर टेंडर, कचरा संग्रहण की तैयारियों, वाहनों के दस्तावेज और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर जनता की नजर अब इस बात पर है कि नई कचरा संग्रहण व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।




































