बीकानेर में सड़कों का हाल,भेदभाव की शिकार या ठेकेदारों की मनमानी?पुष्करणा मैदान के पीछे दिखा अजब-गजब कारनामा; जरूरी इलाकों में धूल फांक रही जनता


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर | विशेष रिपोर्ट,बीकानेर शहर में सड़कों के निर्माण और मरम्मत को लेकर पिछले एक साल से केवल दावों और वादों का दौर जारी है। उच्च अधिकारियों, बड़े नेताओं और मंत्रियों ने कई बार मंचों से आश्वासन दिए कि दीपावली, होली और सावे (शादियों के सीजन) से पहले शहर की सभी जरूरी सड़कों का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर में सड़कों का कार्य अब भी ‘प्रगति पर’ का बोर्ड ओढ़े हुए है, जिसके चलते कुछ इलाकों में तो सड़कें बन गई हैं, लेकिन कई जगहों पर आम जनता अभी भी धूल फांकने को मजबूर है।

इस अधूरे और बेतरतीब काम ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या बीकानेर में सड़कों के निर्माण के नाम पर राजनीति हो रही है, या फिर ठेकेदार अपनी मनमानी पर उतर आए हैं?
मुरलीधर व्यास कॉलोनी और नत्थूसर गेट: कहीं सौगात, तो कहीं सिर्फ आश्वासन
शहर की पॉश कॉलोनियों में शुमार मुरलीधर व्यास कॉलोनी की स्थिति चौंकाने वाली है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहां सड़कों का निर्माण पूरी तरह से भेदभावपूर्ण तरीके से हुआ है। कुछ चुनिंदा गलियों को तो चमका दिया गया, लेकिन जिन गलियों में सड़क की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जब लोग सवाल करते हैं, तो उन्हें सिर्फ ‘आश्वासन’ मिलता है, जबकि बगल वाली गली बनकर तैयार हो जाती है। दबी जुबान में लोग इसे ‘राजनीतिक भेदभाव’ का शिकार बता रहे हैं।
नत्थूसर गेट से ओझा सत्संग भवन की बदहाली:
यही हाल नत्थूसर गेट से ओझा सत्संग भवन की तरफ जाने वाली सड़क का है।
- अधूरा काम: निवासियों के अनुसार, पुष्करणा सावे के दौरान नरसिंग मंदिर से भैरव मंदिर तक तो आनन-फानन में पक्की और मजबूत सड़क बना दी गई, लेकिन उससे आगे का हिस्सा जस का तस छोड़ दिया गया।
- महत्वपूर्ण मार्ग: इस मार्ग पर एक श्मशान, सरकारी डिस्पेंसरी, स्कूल, कन्या कॉलेज और शादी भवन स्थित हैं।
- जलभराव की समस्या: सड़क न होने के कारण यहां अक्सर पानी का तालाब बन जाता है, लेकिन फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।
पुष्करणा मैदान के पीछे का अजब-गजब कारनामा
सड़क निर्माण में ठेकेदारों की मनमानी का सबसे हैरान करने वाला मामला पुष्करणा मैदान के पीछे, रतानी व्यासों की बगेची और गवरा दादी श्मशान भूमि के आसपास के क्षेत्र में सामने आया है। यहां की स्थिति किसी के भी गले नहीं उतर रही है:
- सिर्फ 10-12 फुट का टुकड़ा छोड़ा: यहां लगभग सभी गलियों में सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन अचरज की बात यह है कि एक दुकान और एक घर के ठीक आगे सड़क का मात्र 10 से 12 फुट का हिस्सा जानबूझकर छोड़ दिया गया है।
- बीच में गड्ढा, दोनों तरफ सड़क: सबसे बड़ी हैरानी तब होती है जब देखने पर पता चलता है कि सड़क दोनों छोर से बनकर आ रही है, लेकिन बीच में एक छोटा सा पैच अधूरा छोड़ दिया गया है।
जब स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस अजीबोगरीब स्थिति पर सवाल किया, तो उन्हें हर बार की तरह रटा-रटाया जवाब मिला— “जल्द ही बना देंगे।” महीनों बीत जाने के बाद भी उस 10-12 फुट के टुकड़े पर डामर नहीं पड़ा है।
जनता के तीखे सवाल: आखिर यह दोहरा रवैया क्यों?
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं:
- बजट का गोलमाल? जनता का सीधा सवाल है कि जब ठेकेदार को पूरी सड़क बनाने का बजट आवंटित होता है, तो फिर बीच में 10 फुट का टुकड़ा छोड़कर बजट का पैसा कहां जा रहा है?
- नेताओं की चुप्पी क्यों? जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं? वे ना तो अधिकारियों से जवाबदेही मांग रहे हैं और ना ही ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम कस रहे हैं।
- आम जनता के साथ भेदभाव क्यों? एक ही क्षेत्र में किसी को पक्की सड़क तो किसी को अधूरा निर्माण देकर आम करदाता के साथ यह कैसा न्याय है?
बीकानेर की जनता अब इन झूठे आश्वासनों से थक चुकी है। सवाल अब सिर्फ सड़क के निर्माण का नहीं, बल्कि उस लचर व्यवस्था का है जहां बजट पास होने के बावजूद आम आदमी सुविधा के लिए तरस रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जल्द ही अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर इन सवालों का जवाब देना होगा।




































