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​बीकानेर में पुष्करणा समाज का ऐतिहासिक ‘ओलंपिक सावा’ आज: सैकड़ो जोड़े बंधेंगे परिणय सूत्र में, पहले पहुंचने वाले दूल्हे को मिलेगी बाइक और 51000 नगद इनाम

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:राजस्थान के बीकानेर में आज पुष्करणा समाज की 1000 साल पुरानी और अनूठी परंपरा ‘ओलंपिक सावा’ का आयोजन हो रहा है। इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में आज करीब 130 से ज्यादा जोड़े शादी के बंधन में बंधेंगे। इस आयोजन को ‘ओलंपिक’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ दूल्हों के बीच विवाह स्थल पर पहले पहुंचने की होड़ लगती है, जिसके लिए बारात वाले रास्तों में आकर्षक इनाम रखे गए हैं।

दूल्हों और दुल्हन पक्ष के लिए इनामों की बारिश:

इस अनूठे सावे में समय की पाबंदी और उत्साह को बढ़ाने के लिए कई संस्थाओं ने इनामों की घोषणा की है:

  • बाइक और कैश प्राइज: कर्मवान संगठन की ओर से शाम 4 बजे के बाद नत्थूसर गेट के अंदर आयोजन स्थल पर विष्णु रूप में सबसे पहले पहुंचने वाले दूल्हे को मोटरसाइकिल दी जाएगी।
  • सावित्री कल्ला ट्रस्ट की घोषणा: ट्रस्ट ने बारह गुवाड़ चौक ने विष्णु रूप में सबसे पहले पहुंचने वाले दूल्हे को 51,000 रुपये, दूसरे नंबर पर आने वाले को 31,000 रुपये और तीसरे स्थान वाले को 21,000 रुपये देने का ऐलान किया है। इसके बाद आने वाले 8 दूल्हों को भी 5,100 रुपये प्रत्येक दिए जाएंगे।
  • दुल्हन पक्ष का भी सम्मान: चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र कल्ला के अनुसार, कल शाम 7 बजे के बाद बारह गुवाड़ में गणेश परिक्रमा में पहले पहुंचने वाली 25 दुल्हन पक्षों को साड़ी और 3100 रुपये की शगुन राशि भेंट की गयी थी। साथ ही सभी जोड़ों को गिफ्ट्स भी दिए

1000 साल पुरानी परंपरा और सामाजिक संदेश:

यह सावा पिछले 1000 सालों से चला आ रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर शादी के भारी-भरकम खर्च के बोझ को कम करना है।

  • ​इसमें मेहमानों की संख्या सीमित होती है, जिससे फिजूलखर्ची पर लगाम लगती है।
  • ​पहले यह आयोजन 7 साल में एक बार होता था, फिर 4 साल में लेकिन अब इसे हर 2 साल में एक बार आयोजित किया जाने लगा है।

दुल्हन की तरह सजा पुराना शहर:

सावे को लेकर बीकानेर के पुराने शहर (परकोटे) में उत्सव का माहौल है। पूरे शहर को विवाह स्थल के रूप में सजाया गया है और पिछले कई दिनों से यहाँ जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं। आज एक ही दिन में समाज की सभी शादियां संपन्न होंगी, जो सामाजिक एकता की एक बड़ी मिसाल है।

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