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पीबीएम अस्पताल के 10 करोड़ के टेंडर में अनियमितता का आरोप!

THE BIKANER NEWS:-;बीकानेर। बीकानेर, 29 नवंबर 2025 सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के पीबीएम अस्पताल में जनरल मेडिसिन एवं कैंसर मेडिसिन विभाग के लिए 5-5 करोड़ रुपये (कुल 10 करोड़) के दो अलग-अलग टेंडर एक ही फर्म को देने और उसे अनुचित लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
इस मामले को लेकर शिकायत संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा को प्राप्त हुई है। शिकायत में कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का पूरी तरह पालन नहीं किया गया तथा एक ही फर्म को दोनों टेंडर आवंटित कर नियमों का उल्लंघन किया गया है।

आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने तत्काल संज्ञान लेने और पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक से मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की भी जानकारी सूत्रों से सामने आ रही है।

ज्ञात रहे कि ये दोनों टेंडर SOENIB नंबर 25/25-26 एवं 24/25-26 के तहत 17 अक्टूबर एवं 7 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए थे। शिकायतकर्ता ने इसे भ्रष्टाचार एवं सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है।

पत्र में लिखी बातों का उल्लेख 👇

PBM अस्पताल में जनरल मेडिसिन व कैंसर मेडिसिन के 5-5 करोड़ रुपये के दो बड़े टेंडरों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रशासन को भेजे गए लिखित पत्र में आरोप लगाया गया है कि इन टेंडरों को बिना उचित जांच और बिना समिति की बैठक किए ही अंतिम रूप दे दिया गया, जिससे अस्पताल और मरीजों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

पत्र में कहा गया है कि 7 अक्टूबर 2025 को जारी SOENIB No-24 व 25 के तहत दोनों टेंडरों की प्रक्रिया ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर पूरी की गई। लेकिन 5 से 50+ फर्मों की भागीदारी के बावजूद तकनीकी बोली में सिर्फ कुछ फर्मों को ही योग्य दिखाया गया, वह भी अलग-अलग फर्मों द्वारा भरे गए फॉर्म में स्पष्ट त्रुटियों के बावजूद।

बिना दवा नमूना जाँच के टेंडर को आगे बढ़ाने का आरोप

आरोप यह भी लगाया गया है कि नियमों के अनुसार दवा के नमूनों की जाँच 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए, लेकिन कई दवाएं बाहर से मंगवाई गईं जिन्हें 16 दिन तक स्टोर में रखा गया तथा अभी तक नमूना परीक्षण ही नहीं किया गया।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि—

कई दवाओं के प्रिंट डोज टैग बदलकर प्रस्तुत किए गए।

RMRS की ओर से गठित समिति की कोई बैठक नहीं हुई।

कैंसर मेडिसिन के टेंडर में मनपसंद फर्मों को लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ।

कुछ फर्मों द्वारा दवाओं के फॉर्म में गम्भीर गलतियाँ थीं, बावजूद इसके उन्हें योग्य घोषित किया गया।

पत्र में विशेष रूप से उल्लेख है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर एक को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। लिखा गया है कि इस कंपनी द्वारा सबूत मिटाने के लिए कई बार कैमरे बंद करवाए गए और टेंडर फाइलों की जांच में बाधाएं उत्पन्न की गईं।

टेंडर निरस्तीकरण और उच्चस्तरीय जांच की मांग

पत्र में टेंडर प्रक्रिया को भ्रष्टाचारपूर्ण बताते हुए दोनों टेंडरों को तुरंत निरस्त करने और नई समिति बनाकर जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि—

पिछले 20 वर्षों से PBM में कभी इतने बड़े स्तर पर अनियमितता नहीं हुई।

अस्पताल को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

मरीजों तक घटिया दवाओं के पहुंचने का खतरा है।

सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि इस पूरे प्रकरण की प्रति स्वास्थ्य मंत्री, चिकित्सा सचिव, लोकसभा अध्यक्ष, आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य सहित कई अधिकारियों को भेजी गई है।

अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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