बड़ी खबर:-बीकानेर निकाय चुनाव: आचार संहिता के बीच वोट शिफ्टिंग के आरोप,छुट्टी के दिन बंद कमरे में चल रही थी प्रक्रिया पर उठे सवाल

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। आगामी निकाय चुनावों को लेकर लागू आचार संहिता के बीच बीकानेर में मतदाता सूची में वोट शिफ्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि रविवार के अवकाश के दिन बिना राज्य निर्वाचन आयोग की लिखित अनुमति के बंद कमरे में मतदाताओं को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने की प्रक्रिया की जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर वार्ड 52 के कांग्रेस दावेदारों ने विरोध जताते हुए एडीएम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया।
परिसीमन के बाद उठा विवाद
नए परिसीमन के तहत नगर निगम ने वार्ड 52 के भुट्टों के चौराहे की बाईं तरफ का कुछ क्षेत्र वार्ड 68 में शामिल किया था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नियमानुसार संबंधित मतदाताओं की वोट शिफ्टिंग आचार संहिता लागू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए थी। आरोप है कि प्रक्रिया में देरी के बाद अब आचार संहिता लागू होने के बावजूद मतदाताओं के नाम एक वार्ड से दूसरे वार्ड में किए जा रहे हैं।
आंकड़ों को लेकर भी सवाल
दावेदारों के अनुसार आचार संहिता लागू होने के दिन वार्ड 52 में 8,952 और वार्ड 68 में 6,249 मतदाता दर्ज थे। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना मतदाता सूची में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक लाभ के आरोप
विरोध कर रहे नेताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 52 से भाजपा और वार्ड 68 से कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार अपने-अपने राजनीतिक हितों के लिए मतदाता शिफ्टिंग का दबाव बना रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
किसे कितना फायदा होने का दावा?
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक परिसीमन के बाद भुट्टों के चौराहे की बाईं तरफ के करीब 200 से 300 वोट वार्ड 52 से वार्ड 68 में जाने की संभावना है। उनका दावा है कि इससे वार्ड 52 में भाजपा को चुनावी फायदा मिल सकता है, जबकि वार्ड 68 में अतिरिक्त मतदाताओं से कांग्रेस के निवर्तमान पार्षद परमानंद की स्थिति मजबूत हो सकती है।
मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराने और राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार ही मतदाता सूची में बदलाव करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन और निर्वाचन आयोग इस पूरे विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।




































