शुभकरण गहलोत का भाजपा को समर्थन: जनसेवा के वादे या पर्दे के पीछे की राजनीति?पढ़े खास रिपोर्ट और देखे वो पाँच वादे!






THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:^शुभकरण गहलोत (माली बाबा) द्वारा हाल ही में भाजपा को दिए गए समर्थन ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले का असल कारण क्या है, इसका खुलासा तो 21 तारीख के बाद खुद माली बाबा ही करेंगे। फिलहाल, सोशल मीडिया पर एक वायरल ऑडियो के हवाले से यह चर्चा जोरों पर है कि उन्होंने अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए भाजपा का दामन थामा है। हालांकि, यह स्पष्ट हो चुका है कि वह ऑडियो खुद शुभकरण का नहीं, बल्कि उनके किसी करीबी मित्र का है।
इस समर्थन की असल वजह को समझने के लिए शुभकरण गहलोत द्वारा जनता से किए गए उन पांच प्रमुख वादों पर गौर करना आवश्यक है: यहां देखे पाँच वादे👇👇👇 आप हमारे इंस्टाग्राम पेज पर भी जाकर सीधे देख सकते है
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- 1;-ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: वार्ड की समस्याओं को सीधे दर्ज करवाने के लिए एक समर्पित डिजिटल पोर्टल की शुरुआत करना।
- 2;-वार्ड 44 में लाइब्रेरी: नगर निगम या किसी अन्य सरकारी संस्था के बजाय पूरी तरह से ‘मित्रों के भरोसे’ और सहयोग से एक नई लाइब्रेरी खोलना।
- 3:-नहरबंदी पर जन-आंदोलन: गर्मियों में होने वाली नहरबंदी के दौरान पानी की किल्लत पर सरकार से तीखे सवाल करना और उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना।
- 4:-खेल मैदान का विकास: बच्चों को मोबाइल की स्क्रीन से दूर कर मैदान तक लाने के लिए वार्ड में सुविधाओं से युक्त एक खेल मैदान विकसित करना।
- ‘5:/मित्र मोर्चा’ का गठन: एक हजार से अधिक युवाओं को जोड़कर एक ऐसा संगठन बनाना, जो हर परिस्थिति में जनता की बेबाक आवाज बन सके।
इन वादों का विश्लेषण करने पर जब हम उसके दो नंबर के वादे को सुनते है तो एक स्पष्ट विरोधाभास सामने आता है। शुभकरण ने ये सभी घोषणाएं किसी सत्ता या राजनेता के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी और अपने समर्थकों की ताकत पर पूरी करने का दावा किया था। खासकर, नहरबंदी के मुद्दे पर उनका रुख सीधे तौर पर सिस्टम और सरकार से टकराने का था। ऐसे में, अपने दम पर काम करने का दावा करने वाले व्यक्ति को अचानक किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रत्यक्ष समर्थन की आवश्यकता क्यों पड़ गई?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान उस तस्वीर ने खींचा है जिसमें शुभकरण गहलोत भाजपा का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। लोकतंत्र में मान्यता है कि ‘वोट तो पर्दे की ओट होता है’। यदि बात केवल मतदान करने या किसी को नैतिक समर्थन देने की थी, तो वह काम बिना किसी शोर-शराबे के भी किया जा सकता था। सार्वजनिक रूप से पार्टी का दुपट्टा पहनकर फोटो वायरल करवाना इस बात का संकेत हो सकता है कि ये महज एक वोट या वादे पूरे करने का मामला है, या इसके पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक पटकथा है। ये तो भविष्य बताएगा ,अब जनता की निगाहें 21 तारीख पर टिकी हैं, जब शुभकरण खुद सामने आकर अपने इस कदम की असली वजह स्पष्ट करेंगे।




































