नहरबंदी खत्म होने की भनक लगते ही टूटी नेताओं की नींद: AC कमरों से बाहर निकले साहब, मैदान में दिखा सिर्फ एक ‘बाहुबली’!, जनता अब मानसून के ‘नए हादसों’ के इंतजार में!


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। आखिरकार वो शुभ घड़ी आ ही गई! शहर में नहरबंदी खत्म होने को है और एकाध दिन में नलों से हवा की जगह पानी टपकने की ‘उम्मीद’ जाग उठी है। पानी की आहट पाते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं की कुंभकर्णी नींद टूट गई है। उन्हें अचानक याद आ गया है कि बीकानेर में जलाशय नाम की भी कोई चीज होती है! इतना ही नहीं, भरी गर्मी में सरकारी बाबुओं ने भी बड़ा बलिदान देते हुए अपने ठंडे AC कमरों का मोह त्याग दिया है और बाहर कदम रखा है, ताकि जनता को लगे कि ‘साहब’ नहरबंदी के बाद हालात सामान्य करने के लिए खून-पसीना एक कर रहे हैं।
विधायक जी का ‘सिलेक्टिव’ गुस्सा और साउंडप्रूफ जनसेवा केंद्र
शहर के विधायक व्यास जी ने जलाशयों की धीमी कार्यगति पर ऐसा रौद्र रूप दिखाया और अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए कि कैमरे भी कांप उठे। लेकिन विडंबना देखिए! उनके खुद के ‘जनसेवा केंद्र’ परिसर में ही जलदाय विभाग का दफ्तर चल रहा है। वहां पानी की एक-एक बूंद को तरसती जनता ने कई बार हंगामा किया, पर मजाल है जो विधायक जी को वहां जाने का समय मिला हो! शायद उनके AC कमरों के शीशे इतने शानदार और साउंडप्रूफ हैं कि मोहल्लों में पानी न आने और फ्री टैंकरों के वितरण में हो रहे भेदभाव पर चीखती जनता की आवाजें उन तक पहुंच ही नहीं पाईं।
पूर्व मंत्री जी की ‘ढाई साला’ याददाश्त
इधर, पूर्व मंत्री जी को भी पूरे ढाई साल बाद अचानक ‘ज्ञान’ प्राप्त हुआ है कि उन्होंने कभी कोई महान कार्य (जलाशय) जनता को समर्पित किया था, जो आज तक पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पाया है। खैर, उनकी यह अचानक जागी नाराजगी भी पूरी तरह जायज है। आखिर ढाई साल बाद फिर से चुनाव जो सिर पर आ रहे हैं! अभी से माहौल नहीं बनाएंगे और कैमरे पर गुस्सा नहीं दिखाएंगे, तो जनता को उनका ‘महान कार्य’ कैसे याद रहेगा?
’कागजी’ नेताओं के बीच उभरा ‘बाहुबली’ टैंकर योद्धा!
इस पूरी नहरबंदी के दौरान सबसे दिलचस्प नजारा यह रहा कि ना तो सत्ता पक्ष की तरफ से कोई ‘कागजी पदाधिकारी’ नजर आया और ना ही विपक्ष की तरफ से किसी ने जनता का हाल जानने की जहमत उठाई। इन सबके बीच मैदान में बस एक ही ‘योद्धा’ (पूर्व पार्षद)था, जो किसी ‘बाहुबली’ की तरह पानी के टैंकरों पर सवार होकर इस भीषण गर्मी में जनता तक पानी पहुंचा रहा था। अब तपती दोपहरी में पसीना बहाने के पीछे इस बाहुबली का ‘उद्देश्य’ भले ही कुछ भी हो (चाहे भविष्य की कोई राजनीतिक लाभ हो ), लेकिन सूखी गलों वाली जनता के बीच यह शख्स जबरदस्त वाहवाही बटोरने में जरूर कामयाब रहा है।
अधिकारियों का ‘सिस्टमेटिक मोतियाबिंद’
हालात सामान्य करने का दावा करते हुए सड़कों पर उतरे अधिकारियों को शहर में सब कुछ दिखा, बस टैंकरों की धड़ल्ले से चल रही कालाबाजारी नजर नहीं आई। सरकारी फ्री टैंकरों में किस तरह ‘अपनों’ को फायदा पहुंचाया जा रहा है, इस पर भी साहबों ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। शायद कालाबाजारी का पानी कुछ ज्यादा ही पारदर्शी होता है, जो सरकारी आंखों को दिखाई नहीं देता।
सोशल मीडिया के शूरवीर और मानसून का नया एजेंडा
इन सबके बीच बेचारी जनता ने पानी के लिए जमीन पर संघर्ष करने के बजाय सोशल मीडिया पर पोस्ट और मीम्स बनाकर अपना पूरा गुस्सा निकाल लिया है। चलिए, नहरबंदी का यह सूखा और प्यासा मौसम तो फेसबुक और वॉट्सऐप के सहारे कट ही गया।
अब प्रशासन, नेता और जनता तीनों को बस मानसून का इंतजार है। जैसे ही तेज बारिश आएगी, शहर के पुराने जर्जर घर गिरेंगे और पानी भरे गड्ढों में बाइक सवार , पोल में करंट दौड़ने से बेजुबान गोवंश की मौत होगी—तब जाकर हमारे ‘कागजी’ नेताओं को राजनीति चमकाने का एक ‘नया और फ्रेश’ मुद्दा मिलेगा! तब तक के लिए, बीकानेर की जनता को आने वाले पानी की अग्रिम बधाइयां!

मनोज व्यास…





































