आरटीई छात्रों के लिए नया आदेश: निजी स्कूलों को देनी होंगी मुफ्त किताबें, सत्र के बीच फैसले से बढ़ा असमंजस

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान एक अहम आदेश जारी करते हुए सभी गैर-सरकारी (निजी) विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निशुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों को अब पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक सहायक शिक्षण सामग्री भी मुफ्त उपलब्ध करानी होगी।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो निजी विद्यालय आरटीई विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराएंगे, उन्हें आरटीई फीस पुनर्भरण (Reimbursement) के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

हालांकि यह आदेश शैक्षणिक सत्र शुरू होने के करीब ढाई महीने बाद जारी होने से निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। अधिकांश निजी विद्यालयों में अप्रैल से कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, मई में प्रथम टेस्ट भी आयोजित हो चुके हैं और बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के लिए पहले ही पाठ्यपुस्तकें खरीद चुके हैं।
निजी विद्यालय संचालकों का कहना है कि आदेश में पहले से खरीदी गई पुस्तकों की राशि के भुगतान या रिफंड को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि निशुल्क पुस्तकें किन विद्यार्थियों को और किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाएं।
इस बीच राजस्थान शिक्षक संघ (प्राथमिक एवं माध्यमिक) के मुख्य महामंत्री महेंद्र पांडे ने सरकार से मांग की है कि फीस पुनर्भरण की शर्त लगाने के बजाय सरकार स्वयं आरटीई विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि सरकारी और निजी विद्यालयों में राजस्थान बोर्ड का समान पाठ्यक्रम लागू है, इसलिए आरटीई मद की राशि का उपयोग सीधे पुस्तकों की छपाई और वितरण में किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालयों के बीच विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी।
वहीं, प्रारंभिक शिक्षा विभाग की आरटीई प्रभारी चंद्रकिरण पंवार ने स्पष्ट किया है कि पिछले सत्र में आरटीई के तहत प्रवेशित छात्र-छात्राओं की किताबों की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई जाएगी।





































