बीकानेर का ‘स्वच्छ’ सच: टीम सर्वे में, जनता ‘नर्क’ में! लाखों के स्लोगन, रत्ती भर सफाई नहीं


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। वाह री व्यवस्था! एक तरफ देश भर में स्वच्छता का डंका पीटने वाली ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की केंद्रीय टीम बीकानेर की गलियों की खाक छान रही है, जमीनी हकीकत परख रही है। तो दूसरी तरफ, शहर की सीवरेज व्यवस्था ने दम तोड़ दिया है। हालात ये हैं कि ‘साहब’ एसी कमरों में बैठकर मीटिंगों में व्यस्त हैं, और जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर है।

लाखों के स्लोगन, रत्ती भर सफाई नहीं
शहर की दीवारों पर लाखों रुपए फूंककर ‘स्वच्छ बीकानेर, स्वस्थ बीकानेर’ जैसे भारी-भरकम स्लोगन लिखे जा रहे हैं। लगता है प्रशासन को लगता है कि दीवारों पर सफाई की बातें लिख देने से ही शहर चमक उठेगा। लेकिन हकीकत यह है कि इन स्लोगनों के ठीक नीचे गंदगी के अंबार लगे हैं। नालियों की सफाई का तो जैसे कोई अता-पता ही नहीं। अगर कभी सफाईकर्मी गलती से आ भी जाएं, तो नालियों से निकली कीचड़ हफ़्तों तक सड़क पर ही पड़ी रहती है, जो सूखकर धूल बनकर लोगों के फेफड़ों में समाती है या फिर बारिश में वापस नालियों में ही समा जाती है।
परकोटे के अंदर ‘नर्क’ का नजारा, बाहर भी बुरा हाल
क्या परकोटा और क्या बाहरी बस्तियां, शहर का कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहां सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या न हो। गलियों में बदबूदार काला पानी पसरा है। कई इलाकों में तो घरों के बाहर ही गंदा पानी जमा है, जिससे लोगों का घर से निकलना मुहाल हो गया है। ठेकेदार को फोन करो तो उठाता नहीं, अधिकारी सुनते नहीं। हद तो तब हो गई जब नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने, महज आधा किलोमीटर की दूरी पर लोग डेढ़-डेढ़ फीट गंदे पानी में से गुजरने को मजबूर हैं। अब इसे क्या कहें? निगम की नाक के नीचे ही ‘स्वच्छता’ दम तोड़ रही है!
सर्वेक्षण टीम को कैसे कहें- ‘पधारो म्हारे देश’?
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम बीकानेर में ही डेरा डाले हुए है और गुपचुप तरीके से शहर का जायजा ले रही है। अब सवाल यह उठता है कि जब यह टीम इन बदहाल रास्तों, उफनती सीवरेज और गंदगी के ढेरों को देखेगी, तो बीकानेर की रैंकिंग का क्या होगा? सिर्फ रैंकिंग ही नहीं, प्रदेश में बीकानेर की साख भी मटियामेट होना तय है। ऐसे हालातों में, जब शहर खुद गंदगी में डूबा हो, सर्वेक्षण टीम का स्वागत भला कैसे किया जाए? उन्हें देखकर तो यही कहने का मन करता है, “साहब, थोड़ा संभलकर… कहीं पैर न फिसल जाए, ये बीकानेर की ‘असली’ स्वच्छता है!”





































