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​बीकानेर आर्मी कैंट: नए ठेकेदार की मनमानी के आरोप, वेतन घटाया और खाली स्टाम्प पर मांगे हस्ताक्षर; विरोध करने पर पुराने सफाई कर्मियों को निकाला

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर, 11 मई 2026:बीकानेर के आर्मी स्टेशन मुख्यालय (आर्मी कैंट) में पिछले 8-10 वर्षों से कार्यरत सैकड़ों अस्थाई ठेका सफाई कर्मियों को सोमवार (11 मई) को काम से निकाल दिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नई ठेका कंपनी के प्रतिनिधियों ने उनका वेतन भारी मात्रा में घटा दिया है और उनसे 100 रुपये के खाली स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करने का अनुचित दबाव बनाया। जब कर्मचारियों ने इस शोषण का विरोध किया, तो उन्हें नौकरी से बेदखल कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

सफाई कर्मचारियों द्वारा बीकानेर के लेबर अधिकारी और 24 रैपिड डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल दीपक शेरोन को सौंपे गए शिकायत पत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छावनी में सफाई व्यवस्था का नया ठेका हुआ है। इसके बाद से ही नई कंपनी ने मनमानी शुरू कर दी है।

  • वेतन में भारी कटौती: कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में GOC के प्रयासों से उन्हें 15,300 रुपये मासिक वेतन तथा अतिरिक्त पीएफ (लगभग 2000 रुपये) मिलता था। लेकिन नई ठेका कंपनी उन्हें पीएफ और ईएसआई सहित मात्र 11,000 रुपये मासिक पर काम करने के लिए मजबूर कर रही है।
  • खाली स्टाम्प पर हस्ताक्षर का दबाव: कर्मचारियों ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है कि ठेकेदार के सुपरवाइजर ‘मनोज घारू’ और कंपनी के दो अन्य व्यक्ति उन पर 100 रुपये के हस्ताक्षरित खाली स्टाम्प पेपर जमा करने का दबाव डाल रहे हैं। ऐसा न करने पर उन्हें काम से निकालने और उनकी जगह 100 नए कर्मचारी लगाने की धमकियां दी जा रही थीं।

2 मई से नहीं लगाई हाजिरी, 11 मई को किया बर्खास्त

ज्ञापन के मुताबिक, कर्मचारी 2 मई 2026 से लगातार अपने काम पर उपस्थित हो रहे थे, लेकिन नए नियमों और खाली स्टाम्प पर हस्ताक्षर के लिए राजी न होने के कारण सुपरवाइजर द्वारा उनकी हाजिरी नहीं लगाई जा रही थी। अंततः 11 मई 2026 को नई कंपनी ने सभी पुराने ठेका कर्मियों को फरमान सुनाते हुए काम से निकाल दिया। इस पूरे घटनाक्रम से लगभग 200 कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

कोरोना काल में भी दी थीं सेवाएं

अचानक काम से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों में भारी रोष और आर्थिक असुरक्षा की भावना है। उनका कहना है कि वे गरीब मजदूर वर्ग से आते हैं और उन्होंने कोरोना जैसी भयंकर महामारी के दौरान भी जान की परवाह किए बिना आर्मी के साथ खड़े रहकर काम किया था। अब नई कंपनी द्वारा इस तरह का व्यवहार उनके साथ अन्याय है।

अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार

पीड़ित सफाई कर्मियों ने न्याय के लिए उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने 2 मई को लेबर अधिकारी (सादुलगंज) और 11 मई को GOC को पत्र लिखकर प्रार्थना की है कि तीनों जोन की लेबर का ‘दरबार’ लगाकर उनकी समस्याएं सुनी जाएं। उन्होंने मांग की है कि उन्हें उनका वाजिब पुराना वेतन दिलाया जाए और सम्मानपूर्वक वापस काम पर रखा जाए।

​इस ज्ञापन की प्रतिलिपि डिप्टी जीओसी (Dy. GOC), एसएचओ (SHO), एस.ओ. (SO) और एडमिनिस्ट्रेशन कमांडेंट को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है। अब देखना यह है कि सैन्य और श्रम विभाग के अधिकारी इन गरीब मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए ठेकेदार पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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