बीकानेर: खारिज इंतकाल को रिकॉर्ड में दर्ज न कर 62 बीघा जमीन बेचने का आरोप, राजस्व अमले पर मिलीभगत का शक!


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर।जिले की तहसील बीकानेर के ग्राम करमीसर में एक बड़ा भूमि विवाद और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में खारिज हो चुके इंतकाल (Mutation) का इन्द्राज न कर, पुरानी प्रविष्टियों का फायदा उठाते हुए बेशकीमती जमीन को अवैध रूप से बेचा जा रहा है। इस मामले में राजस्व कर्मचारियों (अमलेराज) की भारी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर, बीकानेर को एक लिखित शिकायत सौंपी गई है।

क्या है पूरा मामला?
करमीसर निवासी बजरंग पुत्र ईश्वरराम जाट ने जिलाधीश को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि ग्राम करमीसर के खसरा नंबर 49/52 की 62 बीघा 8 बिस्वा (कच्ची) भूमि मूल रूप से नारायण पुत्र नानूराम जाट के नाम पर थी। नारायण के निधन के बाद यह भूमि उनके वारिसान चुन्नी, ईश्वरराम और खेतु के नाम गैर-खातेदारी के रूप में दर्ज हुई थी (इंतकाल नं. 887)।
बाद में इस भूमि पर इंतकाल नं. 471 के तहत खातेदारी दे दी गई, लेकिन 27 मार्च 2008 को इस खातेदारी इंतकाल को खारिज कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि ईश्वरराम और चुन्नी देवी ने इस खारिज आदेश के खिलाफ उपखण्ड अधिकारी (SDO), बीकानेर की अदालत में अपील पेश कर रखी है, जिससे यह साबित होता है कि वर्तमान में यह उनकी खातेदारी भूमि नहीं है।
राजस्व रिकॉर्ड में खेल और अवैध बिक्री
प्रार्थी बजरंग का मुख्य आरोप यह है कि 27.03.2008 को इंतकाल खारिज होने के बावजूद, राजस्व अमले ने जानबूझकर इसे राजस्व रिकॉर्ड में अंकित (अपडेट) नहीं किया। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर ईश्वरराम और चुन्नी देवी खुद को खातेदार बताकर धड़ल्ले से इस जमीन के विक्रय पत्र (Sale Deeds) तैयार कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि राजस्व कर्मचारी इन अवैध विक्रय पत्रों के आधार पर नए इंतकाल भी दर्ज कर रहे हैं, जबकि यह मामला सक्षम न्यायालय में लंबित है।
पारिवारिक विवाद और नियमों की अनदेखी
शिकायतकर्ता बजरंग ने बताया कि यह भूमि पुश्तैनी है और उसने अपने हकों के लिए सहायक कलेक्टर, बीकानेर की अदालत में दावा भी प्रस्तुत कर रखा है।
- कब्जा: मौके पर विवादित भूमि का कब्जा प्रार्थी बजरंग के पास है, न कि जमीन बेचने वालों के पास।
- टी.पी. एक्ट का उल्लंघन: शिकायत में कहा गया है कि मामला न्यायालय में लंबित (Sub-judice) होने के बावजूद जमीन बेचना ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी (T.P.) एक्ट की धारा 52 के सख्त खिलाफ है।
प्रशासन से क्या है मांग?
शिकायतकर्ता ने बताया कि पूर्व में तहसील कार्यालय में कई प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त से यह मांग की गई है कि:
- 27.03.2008 को खारिज हुए इंतकाल नंबर 471 को तुरंत प्रभाव से राजस्व रिकॉर्ड में अंकित किया जाए।
- इस खारिज आदेश के बाद से अब तक किए गए तमाम विक्रय पत्रों के आधार पर दर्ज इंतकालों को रद्द किया जाए।
- मिलीभगत करने वाले राजस्व कर्मियों और तथ्य छिपाकर जमीन बेचने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।





































