बड़ी खबर:-पीएम आवास योजना के 2.83 करोड़ रुपये के भुगतान में गड़बड़ी,पत्नी,साले और परिचितों के अकाउंट में भुगतान करवाया

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। प्रधानमंत्री आवास योजना के भुगतान से जुड़ी करीब 2.83 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मामला देशनोक नगर पालिका का है आरोप है कि नगर पालिका की पीएम आवास योजना शाखा में कार्यरत कर्मचारी ने लाभार्थियों के नाम पर तैयार किए गए बिलों में कथित तौर पर उनके बैंक खातों के स्थान पर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खाते दर्ज कर सरकारी राशि का भुगतान दूसरे खातों में करवा दिया।
49 बिलों की जांच में सामने आया मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएम आवास योजना शाखा में कार्यरत कर्मचारी सुरेंद्र सिंह टिंडल द्वारा करीब 49 बिलों में कथित हेराफेरी की गई। बिलों पर लाभार्थियों के नाम सही लिखे गए, लेकिन आरोप है कि उनके बैंक अकाउंट नंबर के स्थान पर कर्मचारी ने अपनी पत्नी, साले, अन्य परिजनों और परिचितों के बैंक खाते दर्ज कर दिए।
लाभार्थी का नाम सही होने के कारण बिलों को स्वीकृति मिलती रही और इसके बाद योजना की राशि संबंधित खातों में ट्रांसफर हो गई।
2.83 करोड़ का भुगतान, 84 लाख वापस
अधिशासी अधिकारी रवींद्र सिंह की ओर से गठित जांच समिति ने नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच के 49 बिलों की जांच की। जांच में करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये का भुगतान कथित रूप से ऐसे खातों में किया जाना सामने आया, जिन्हें जांच में अवैध लाभार्थियों के खाते बताया गया है।
मामला सामने आने और नोटिस जारी होने के बाद कर्मचारी की ओर से 84 लाख रुपये वापस जमा करवाए जाने की जानकारी है। वहीं करीब 1 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपये की राशि की रिकवरी अभी बाकी बताई जा रही है।
जांच समिति के सामने नहीं हुए पेश
विभागीय जांच के दौरान कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। हालांकि, जानकारी के अनुसार वह जांच समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और न ही मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध करवाए।
अधिशासी अधिकारी के अनुसार, सुरेंद्र सिंह टिंडल को 23 सितंबर 2026 को ही निलंबित किया जा चुका है।
एसपी से मिलकर सौंपी शिकायत
मामले की जानकारी 5 अक्टूबर 2026 को अधिशासी अधिकारी ने स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक को पत्र के माध्यम से दी। इसके बाद बुधवार को अधिशासी अधिकारी ने बीकानेर एसपी मृदुल कच्छावा से मुलाकात कर शिकायत पत्र, जांच रिपोर्ट और एफआईआर के लिए संबंधित दस्तावेज सौंपे।
एसपी ने मामले की जांच के लिए संबंधित थानाधिकारी को निर्देश दिए हैं। चूंकि आरोपी कर्मचारी सरकारी सेवा में है, इसलिए पुलिस स्तर पर प्राथमिक जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई और एफआईआर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
फिलहाल मामला विभागीय जांच और पुलिस जांच के दायरे में है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और वित्तीय अनियमितता के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।




































