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Bikaner crime:-नकली पुलिस आधिकारी बनकर, बुजुर्ग से 75 हजार की ठगी

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। जिला मुख्यालय पर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे पुलिस अधिकारी बनकर सरेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ताजा और बेहद संवेदनशील मामला बीछवाल थाना इलाके का है, जहां रोडवेज बस स्टैंड के सामने खुद को पुलिस का सीओ (CO) बताकर दो शातिर बदमाशों ने एक बुजुर्ग किसान की गाढ़ी कमाई लूट ली। बदमाशों ने किसान से 75 हजार रुपये ठग लिए। सबसे दुखद पहलू यह है कि किसान ने यह रकम अपनी फसल बेचकर अपने कैंसर पीड़ित बेटे के इलाज के लिए जुटाई थी।

बज्जू के गज्जेवाला (चक 8 डब्लूजेएम) के रहने वाले 63 वर्षीय किसान ईश्वर राम खेतीबाड़ी करते हैं। वह 2 जून को कृषि उपज मंडी में अपनी फसल बेचने आए थे। अगले दिन, वह अपनी फसल के 75 हजार रुपये नकद लेकर पैदल ही श्रीगंगानगर चौराहे की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान रोडवेज बस स्टैंड के सामने एक ढाबे के पास उन्हें ठगों ने अपना शिकार बना लिया।

बदमाशों ने इस ठगी को अंजाम देने के लिए एक सोची-समझी स्क्रिप्ट का इस्तेमाल किया:
मोटरसाइकिल के पास खड़े एक युवक ने किसान को रोका, खुद को पुलिस का सीओ बताया और एक फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर रौब झाड़ा।

ठग ने किसान से कहा, “कल ही बाजार में 3 लाख रुपये के नकली नोट पकड़े गए हैं। हम चेकिंग कर रहे हैं, तुम्हारे पास जो पैसे हैं उन्हें दिखाओ।” पुलिस के नाम से बुजुर्ग किसान घबरा गया।

किसान को पूरी तरह जाल में फंसाने के लिए, जब फर्जी अधिकारी पूछताछ कर रहा था, तभी पीछे से एक और व्यक्ति (जो ठगों का ही साथी था) मोटरसाइकिल लेकर वहां पहुंचा। फर्जी अधिकारी ने उसे भी रोका और पैसे दिखाने को कहा। उस व्यक्ति ने तुरंत अपनी जेब से नकदी निकालकर दिखा दी। इससे किसान को पूरा विश्वास हो गया कि सामने सचमुच बड़ा पुलिस अधिकारी है और चेकिंग चल रही है।

विश्वास में आए किसान ने अपनी रकम उन्हें दिखा दी। ठगों ने हाथ की सफाई दिखाते हुए असली नोट पार कर दिए और लिफाफे में पेपर की कटिंग (कागज के टुकड़े) रख दिए।

किसान ईश्वर राम को ठगी का पता तब चला जब वह घर पहुंचे। उनके बेटे रामस्वरूप (जो कैंसर से जूझ रहा है) ने बताया कि पिता ने जब घर आकर लिफाफा संभाला तो उसमें कागज के टुकड़े देखकर वे सन्न रह गए।
​अपनी जीवनभर की कमाई और बेटे के इलाज के पैसे लुट जाने के बाद पीड़ित बुजुर्ग ने बीछवाल थाने में परिवाद (शिकायत) दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अब तक न तो मुकदमा (FIR) दर्ज किया है और न ही आरोपियों की कोई धरपकड़ की है। पीड़ित परिवार न्याय के लिए थाने के चक्कर लगाने को मजबूर है।

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