मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों की वसूली,लेकिन सुविधाएं शून्य सुबह से ट्रांसफार्मर खराब,जनता गर्मी से बेहाल


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:निजी बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं से मीटर चार्ज, उपकरण रखरखाव और अन्य कार्यों के नाम पर हर महीने करोड़ों रुपये की भारी-भरकम वसूली की जाती है। बड़े-बड़े दावे करने वाली इस कंपनी की असलियत तब सामने आती है, जब शहर में कोई तकनीकी खराबी आ जाए या ट्रांसफार्मर जल जाए। फॉल्ट को दुरुस्त करने या नया ट्रांसफार्मर लगाने में कंपनी को घंटों लग जाते हैं, और इस दौरान आम जनता भीषण परेशानी झेलने को मजबूर होती है।

ताजा मामला शहर के रतानी व्यासों के चौक का है। यहाँ आज सुबह ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण पूरे इलाके की बत्ती गुल हो गई। घंटों बीत जाने के बाद भी ट्रांसफार्मर को बदला नहीं जा सका है। हैरान करने वाली बात यह है कि 7 से 8 घंटे तक बिजली बंद रहने के बावजूद कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के लिए किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था (बैकअप) नहीं की गई।
संसाधनों का टोटा और मैपिंग की जानकारी का अभाव
इस भारी अव्यवस्था के पीछे कंपनी की घोर लापरवाही और संसाधनों की कमी साफ नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, फॉल्ट को समय पर दुरुस्त न कर पाने की एक बड़ी वजह बाहर से आए अधिकारी और कर्मचारी भी हैं। इन बाहरी कर्मचारियों को शहर की भौगोलिक स्थिति और पुरानी बिजली लाइनों की मैपिंग की पूरी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में जब कोई बड़ा फॉल्ट होता है, तो उसे ढूंढने और ठीक करने में कंपनी के कर्मचारियों के पसीने छूट जाते हैं।
कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल:
- जब रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले जा रहे हैं, तो इमरजेंसी के लिए पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं हैं?
- बाहरी कर्मचारियों को फील्ड में उतारने से पहले शहर की बिजली लाइनों की मैपिंग से अवगत क्यों नहीं करवाया जाता?
- 7-8 घंटे के लंबे शटडाउन या फॉल्ट की स्थिति में दूसरी लाइन से सप्लाई चालू करने का कोई बैकअप प्लान क्यों नहीं है?
निजी कंपनी की इस लचर कार्यप्रणाली से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए कंपनी की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि जनता को अपने ही पैसों के बदले इस तरह की प्रताड़ना न झेलनी पड़े।





































