Bikaner:-अजीबोगरीब मामला आया सामने,खुद को जिंदा साबित करने के लिए एक साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है युवक!

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर/सरकारी दफ्तरों में लापरवाही का एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। मामला पूगल तहसील के कुम्हारवाला का है, जहां एक व्यक्ति अपने मृत भाई का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गया था, लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों ने जल्दबाजी में आवेदक (जिंदा भाई) का ही डेथ सर्टिफिकेट बना दिया।

क्या है पूरा मामला?
अक्टूबर 2024 में एनुलहक (पुत्र अल्लाहबख्श) की पीबीएम अस्पताल में मौत हो गई थी। एनुलहक के भाई, इनामुलहक ने अपने भाई के मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) के लिए नगर निगम में आवेदन किया। करीब 3 महीने के इंतजार के बाद जब इनामुलहक प्रमाण पत्र लेने पहुंचा, तो उसके होश उड़ गए। निगम ने जो सर्टिफिकेट थमाया, वह मृतक एनुलहक का नहीं, बल्कि खुद इनामुलहक का था। यानी सरकारी कागजों में जिंदा भाई को मुर्दा घोषित कर दिया गया।
अधिकारी के सामने पहुंचा पीड़ित
गलत सर्टिफिकेट सुधरवाने के लिए पीड़ित पिछले एक साल से निगम के चक्कर काट रहा था। कभी उसे एक टेबल पर भेजा जाता तो कभी दूसरी पर। सिस्टम से थक-हारकर शुक्रवार को इनामुलहक सीधे निगम उपायुक्त यशपाल आहूजा के सामने पेश हुआ। उसने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “साहब, ये मेरा डेथ सर्टिफिकेट है और मैं आपके सामने जिंदा खड़ा हूं।” मामला गंभीर देख उपायुक्त ने तुरंत हेल्प सेंटर प्रभारी को तलब किया।
नाम में कन्फ्यूजन या लापरवाही?
इस भारी चूक के पीछे का कारण बेहद मामूली बताया जा रहा है। दरअसल, मृतक ‘एनुलहक’ और आवेदक ‘इनामुलहक’ के नाम में काफी समानता है। निगम कार्मिक ने बिना देखे जल्दबाजी में ‘आवेदक’ के नाम से ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। हालांकि, अस्पताल के कागजों में मृतक का नाम सही है, गलती सिर्फ निगम स्तर पर हुई है।
परिवार भुगत रहा खामियाजा
नगर निगम की इस ‘स्पेलिंग मिस्टेक’ की सजा एक बेसहारा परिवार भुगत रहा है। मृतक एनुलहक की पत्नी और बच्चे को मौत के बाद मिलने वाले मुआवजे और सहायता राशि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जहां भी वे आवेदन करते हैं, वहां सही डेथ सर्टिफिकेट मांगा जाता है, लेकिन निगम ने पति की जगह देवर (इनामुलहक) को मृत घोषित कर रखा है। अब देखना यह है कि निगम अपनी इस गलती को कितनी जल्दी सुधारता है।




































