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युवा स्वदेशी वस्तुएं खरीदें ताकि भारत आर्थिक और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकें- प्रो. रमेश मकवाना

बनास्थली विद्यापीठ में समाजशास्त्र विभाग एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के तत्व स्थान में 28 29 अगस्त को राष्ट्रीय एकता विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठि का आयोजन किया गया था । संगोष्ठी का प्रारंभ सिद्धार्थ शास्त्रीजीने स्वतंत्रता में सरदार पटेल के एकीकरण के प्रयासों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि विस्तृत रूप से प्रस्तुत की थी। प्रो. हितेंद्र सिंह राठौड़ ने संगोष्ठी की पूर्व भूमि का विस्तार से प्रस्तुत की थी।बाद में प्रो. श्वेता प्रसाद ने सरदार पटेल के विपिन आंदोलन में भूमिका एवं उनके संघर्ष की गाथा प्रस्तुत की थी।

गुजरात स्थित सरदार पटेल विश्वविधालय के समाजशास्त्र के प्रो. रमेश मकवाना ने बारदोली सत्याग्रह और खेड़ा सत्याग्रह के विभिन्न पहलुओ और उनमे सरदार पटेल के योगदान के बारे मे गहराई से चर्चा की थी। साथ मे बताया की पटेल महिलाओं को सशक्त और शिक्षित देखना चाहते थे। महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्षधर थे और मानते थे कि महिलाओं की भागीदारी के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता।

प्रो. मकवानाने असहयोग आंदोलन पर प्रकास डालकर कहा था की यह आंदोलन ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार करने पर केंद्रित था और इसमें स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को प्राथमिकता दी जाने की बात प्रमुख थी। इससे भारत देश आर्थिक और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करेगे। प्रो. मकवानाने राष्ट्रीय संगोष्ठी मे सहभागी सभी युवाओको आह्वान किया था की आप सब आज से सुनिश्चित करो की हम ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार करेंगे और स्वदेशी वस्तुओं की खरीद करेंगे और तभी हम प्रधानमंत्री के पाँच ट्रिलिअन ईकोनोमी के स्वपन को साकार करेंगे और भारत को विश्व मे सुपर पावर बनाएंगे। अंत में शोध पत्र प्रेजेंटेशन हुआ था एवं अभार विधि संपन्न की थी।

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