कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी का भंडाफोड़, 17 गिरफ्तार; 9 करोड़ की दवाएं और 50 लाख नकद जब्त

THE BIKANER NEWS:-नई दिल्ली: दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कैंसर की महंगी जीवनरक्षक दवाओं की कथित कालाबाजारी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन दिन तक चली कार्रवाई में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सरकारी मुफ्त दवा योजना के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले महंगे कैंसर इंजेक्शनों को अवैध तरीके से हासिल कर ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की 588 वायल कैंसर की दवाएं और 50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
मुफ्त मिलने वाला इंजेक्शन ब्लैक मार्केट में बेचने का आरोप
जांच में सामने आया है कि सरकारी योजना के तहत मुफ्त उपलब्ध कराए जाने वाले बावेंसियो 200 एमजी/10 एमएल इंजेक्शन को कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में महज 10 हजार रुपये में बेचा जाता था। वहीं, अस्पतालों में मरीजों को यह इंजेक्शन करीब 1 लाख रुपये की कीमत पर लगाया जाता था।
डिप्टी ड्रग कंट्रोलर राजीव भार्गव के अनुसार, संबंधित दवा कंपनी ने पुष्टि की है कि बरामद इंजेक्शन राजस्थान सरकार द्वारा खरीदे गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली ड्रग कंट्रोलर ने दवा कंपनियों से भी इस संबंध में जानकारी मांगी है।
अस्पताल कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि सरकारी अस्पतालों से इन महंगी दवाओं को बाहर निकालने में कुछ अस्पताल कर्मचारियों, अटेंडेंट और सफाई कर्मियों की भूमिका हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि दवाएं अस्पतालों से किस तरह बाहर पहुंचाई जाती थीं और फिर उन्हें ब्लैक मार्केट तक कौन पहुंचाता था।
दवाओं की पहचान मिटाने का खेल
जांच में गिरोह द्वारा दवाओं की पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर एसीटोन जैसे रसायनों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इससे बैच नंबर, एमआरपी और अन्य पहचान संबंधी चिह्न हटाने की कोशिश की जाती थी।
इसके अलावा पुराने कार्टन और खाली डिब्बों को दोबारा पैकेजिंग के लिए सुरक्षित रखने तथा खाली वायल में असली दवा भरकर बेचने की आशंका भी जांच में सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड और ड्रग लाइसेंस के ये दवाएं आरोपियों तक कैसे पहुंचीं।
दिल्ली से राजस्थान और हैदराबाद तक फैले तार
पुलिस की कार्रवाई में सामने आया नेटवर्क दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद, नवी मुंबई, हैदराबाद और अलवर तक फैला होने की बात सामने आई है।
गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली के अभिषेक, शुभम, सूरज और सतीश, गाजियाबाद के गगन-विश्वास, गुरुग्राम के मुकेश-मयंक, नवी मुंबई के आयुष, हरियाणा के परमजीत, नोएडा के आनंद, हैदराबाद के श्रीनिवासुलु, रामदास और श्रीनाथ रेड्डी, फरीदाबाद के दीपक और जसवंत तथा अलवर के मनीष शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी योजना के तहत खरीदी गई दवाएं सप्लाई चेन से किस स्तर पर बाहर निकाली गईं और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।





































