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छोटी काशी की बेटी ज्योति स्वामी को काशी में मिला ‘काशी गौरव सम्मान 2026’ धार्मिक-आध्यात्मिक अभिरुचि, मंदिरों की सजावट, कला-संस्कृति संवर्धन और साहित्य में योगदान के लिए हुईं सम्मानित

THE BIKANER NEWS:बीकानेर/वाराणसी। छोटी काशी बीकानेर की बेटी ज्योति स्वामी ने काशी की पावन धरती पर बीकानेर का गौरव बढ़ाया। वाराणसी के लमही में आयोजित काशी कवि कुंभ 2026 के भव्य आयोजन में ज्योति स्वामी को ‘काशी गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान धार्मिक एवं आध्यात्मिक अभिरुचि, भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन, कला-साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय योगदान एवं लेखन के लिए प्रदान किया गया। इस आयोजन में ज्योति स्वामी राजस्थान की एकमात्र प्रतिभागी रहीं।

ज्योति स्वामी धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को कला, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर सक्रिय रही हैं। उनका मानना है कि भारतीय कला एवं साहित्य हमारी आध्यात्मिक चेतना, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। इसी उद्देश्य से वे कविता लेखन, रंगोली, मांडना, कला-सृजन और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जनसामान्य से जोड़ने का प्रयास करती रही हैं।

देवस्थान विभाग के साथ मंदिरों में कला और भक्ति का अनूठा संगम

ज्योति स्वामी ने देवस्थान विभाग के साथ मिलकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। मंदिरों को पुष्पों और पंखुड़ियों से आकर्षक रूप से सजाने से लेकर धार्मिक आयोजनों को कला एवं जनभागीदारी से जोड़ने तक उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

जगन्नाथ महोत्सव के अवसर पर धान से विशेष रंगोली बनाकर ‘अन्न’ की महिमा और भगवान जगन्नाथ के प्रति आस्था का संदेश दिया गया। इस आयोजन में कला को भक्ति से जोड़ने के साथ-साथ महिलाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी दिया गया। महिलाओं को धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़कर उन्हें अपनी कला प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना ज्योति स्वामी के कार्यों की एक विशेष पहल रही है।

मंदिरों की पुष्पसज्जा एवं रंगोली जैसे रचनात्मक कार्यों के माध्यम से उन्होंने धार्मिक स्थलों को कला और संस्कृति के जीवंत केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उनके इन प्रयासों में भक्ति के साथ भारतीय लोककला, परंपरा और सामूहिक सहभागिता को भी स्थान मिला।

अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं ज्योति स्वामी

ज्योति स्वामी को साहित्य, कोविड सेवा, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान के लिए पूर्व में भी कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं—

  • Captain of Literacy Warrior Award — StoryMirror App द्वारा कविता एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए।
  • Woman Recognition Award 2022 (WRA) — Rajasthan Patrika द्वारा कोविड वैक्सीनेशन एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए।
  • Daughter of Bikaner Award 2022 — पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कोविड वैक्सीनेशन के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में योगदान के लिए।
  • रंगोली सजाओ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में बीकानेर जिले में प्रथम स्थान।
  • Zonal Cultural Queen Winner 2023 — इस्कॉन मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंत्र उच्चारण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए।
  • Super Woman Award 2024 — Forever Star India द्वारा।
  • Mrs. India Talented 2024 — सौंदर्य, प्रतिभा एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के क्षेत्र में उपलब्धि।

कला, साहित्य और आध्यात्मिकता को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास

सरकारी अस्पताल में असिस्टेंट प्रोग्रामर के रूप में कार्यरत ज्योति स्वामी अपनी नौकरी के साथ कविता, साहित्य, रंगोली, मांडना, कला-सृजन और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। विभिन्न आयोजनों के समन्वय एवं संचालन में भी उनकी भूमिका रही है।

कोविड काल में स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा से लेकर धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों और पर्यावरण जागरूकता अभियानों तक उनकी सक्रियता रही है। हाल ही में ‘मिट्टी के गणेश अपनाएँ’ अभियान के माध्यम से उन्होंने गणेश भक्ति को प्रकृति संरक्षण के संदेश से जोड़ते हुए मिट्टी के गणेश अपनाने के लिए जनजागरूकता का प्रयास किया।

ज्योति स्वामी ने काशी में सम्मान प्राप्त करने के बाद कहा कि “छोटी काशी बीकानेर की बेटी को काशी की पावन धरती पर सम्मान मिलना मेरे लिए गौरव के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। यह सम्मान मुझे भारतीय संस्कृति, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों, कला और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना के लिए और अधिक कार्य करने की प्रेरणा देगा।”

काशी में मिला ‘काशी गौरव सम्मान 2026’ ज्योति स्वामी की धार्मिक अभिरुचि, आध्यात्मिक चेतना, कला-संस्कृति के प्रति समर्पण और साहित्यिक सक्रियता की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है। छोटी काशी से काशी तक की उनकी यह यात्रा भक्ति, कला, साहित्य और संस्कृति के संगम की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

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