बीकानेर:-पुस्तक संस्कृति को समर्पित रहा रंगा की 93वीं जयंती पर आयोजित समारोह का प्रथम दिन


THE BIKANER NEWS:^बीकानेरप्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की 93वीं जयंती पर आयोजित ‘‘सृजन सौरम – हमारे बाऊजी’’ समारोह के प्रथम दिन आज पुस्तक संस्कृति, गौ सेवा एवं पौधारोपण के कार्यक्रम हुए। लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में आयोजित कार्याक्रम में कीर्तिशेष रंगा की विभिन्न विधाओं की 100 से अधिक पुस्तकें युवा पीढ़ी को निःशुल्क अर्पित की गइ।


कार्यक्रम में सानिध्य प्रदान करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि आज का युवा जब मोबाइल में उलझा है, ऐसे में उनको निःशुल्क पुस्तकें अर्पित करना एक क्रांतिकारी कदम है। पर्यावरण और गौसेवा को समारोह से जोड़ना उनकी सर्व-समावेशी दृष्टि को दर्शाता है। बाऊजी मेरे लिए पिता से बढ़कर एक संस्था थे। वे कहते थे – लिखो ऐसा कि बीकानेर की धूल भी बोल उठे। रंगा ने आगे कहा कि आज जब उनकी किताबें हम युवाओं के हाथों में दे रहे हैं, तो हम केवल पुस्तकें ही नहीं बल्कि बीकानेर की साहित्यिक आत्मा इनकों सौंप रहे हैं। उनकी रंग-यात्रा और लेखनी ने हमें सिखाया कि साहित्य ड्राइंग रूम की शोभा नहीं, बल्कि सड़क का संघर्ष है।
समारोह अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि – 93 वर्ष पहले जन्मे बीकानेर के एक सपूत कैसे पूरे देश के साहित्यिक बाऊजी बन गये, यह शोध का विषय है। बाऊजी का मानना था कि शिक्षा तब तक अधूरी है, जब तक उसमें संस्कार और संस्कृति न हो। आज पुस्तकें अर्पित कर, पौधे लगाकर और गौ सेवा कर हम उसी शिक्षा को पुनर्जीवित कर रहे हैं। ट्रस्ट के इस प्रयास से पुस्तक-पाठक संस्कृति को संबल मिलेगा।
विशिष्ट अतिथि हरिनारायण आचार्य ने कहा कि – रंगा जी ने राजस्थानी व हिंदी साहित्य में विपुल सृजन किया और अनुवाद एवं संपादन के क्षेत्र में भी इनका योगदान उल्लेखनीय है। उनका चिंतन राष्ट्रीय था, लेकिन जड़ें बीकानेरी थी।
समारोह में भवानी सिंह, शिव दाधीच, गिरिराज पारीक, अशोक शर्मा, कासिम बीकानेरी, राहुल, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, किशन देराश्री, रामेश्वर सुथार, चम्पालाल, कन्हैयालाल सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। संचालन युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने किया व आभार शिक्षाविद् महावीर स्वामी ने ज्ञापित किया।





































