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71 साल से बीकानेर दशहरा कमेटी से जुड़ा झाँब परिवार, तीन पीढ़ियों से निभा रहा परंपरा और सेवा का दायित्व

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर का दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस आयोजन को वर्षों से निरंतर आगे बढ़ाने में बीकानेर दशहरा कमेटी का अहम योगदान रहा है। कमेटी की 71 साल पुरानी यात्रा में एक ऐसा परिवार भी शामिल है, जिसकी तीन पीढ़ियां लगातार इस आयोजन से जुड़कर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। यह परिवार है झाँब परिवार, जिसने संस्थापक के रूप में शुरुआत करने से लेकर वर्तमान में कमेटी की विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने तक अपना योगदान दिया है।

महेरचंद झाँब ने 71 वर्ष पूर्व रखी थी कमेटी की नींव

बीकानेर दशहरा कमेटी की स्थापना 71 वर्ष पूर्व महेरचंद झाँब ने की थी। उनके प्रयासों से शुरू हुई इस परंपरा को आगे बढ़ाने में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महेरचंद झाँब के बाद उनके पुत्र संजय झाँब ने कमेटी के महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली और इस आयोजन की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

तीसरी पीढ़ी भी निभा रही जिम्मेदारी

महेरचंद झाँब के पौत्र नमन झाँब वर्तमान में बीकानेर दशहरा कमेटी में झाँकी प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस प्रकार परिवार की तीसरी पीढ़ी भी दशहरा आयोजन से जुड़कर अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

20 वर्षों से बाबा रामदेव की भूमिका निभा रहे नरेश झाँब

महेरचंद झाँब के दूसरे पुत्र नरेश झाँब भी दशहरा आयोजन में विशेष योगदान दे रहे हैं। वे पिछले 20 वर्षों से दशहरे की झाँकी में बाबा रामदेव की भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह निरंतर जुड़ाव आयोजन की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति परिवार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सुनीत झाँब संभाल रहे कमेटी अध्यक्ष की जिम्मेदारी

इसी परिवार की एक अन्य कड़ी सुनीत झाँब हैं, जो महेरचंद झाँब के भाई के पुत्र हैं। सुनीत झाँब वर्तमान में बीकानेर दशहरा कमेटी के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में कमेटी दशहरा आयोजन से जुड़ी गतिविधियों का संचालन कर रही है।

एक परिवार, तीन पीढ़ियां और दशहरे से अटूट जुड़ाव

महेरचंद झाँब द्वारा स्थापित कमेटी से लेकर संजय झाँब के महासचिव पद पर योगदान, नरेश झाँब की दो दशक से निभाई जा रही बाबा रामदेव की भूमिका, नमन झाँब की झाँकी प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी और सुनीत झाँब के अध्यक्ष पद तक का सफर इस परिवार के दशहरा आयोजन से लंबे जुड़ाव को दर्शाता है।

झाँब परिवार की यह यात्रा बताती है कि किसी परंपरा को जीवित रखने में केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बीकानेर दशहरा कमेटी के 71 वर्षों के इतिहास में इस परिवार का योगदान शहर की सांस्कृतिक विरासत और दशहरा आयोजन से उसके निरंतर जुड़ाव की एक उल्लेखनीय मिसाल है।

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