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बीकानेर में सफाई व्यवस्था बदहाल: टिपरों की कमी, बाहरी चालकों को रास्तों की जानकारी नहीं, दो चक्कर में बैटरी डिस्चार्ज,घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर उठे रहे सवाल!

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। शहर में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को लेकर नगर निगम के दावों और जमीनी हालात के बीच अंतर नजर आ रहा है। कचरा संग्रहण करने वाले टिपरों की कमी, चालकों को शहर की अंदरूनी गलियों की जानकारी नहीं होने और इलेक्ट्रिक टिपरों की बैटरी क्षमता को लेकर सामने आ रही समस्याओं ने सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन परिस्थितियों में शहर के कई इलाकों में नियमित कचरा संग्रहण को लेकर परेशानी होने की बात सामने आ रही है।


टिपरों की कमी से प्रभावित हो रहा कचरा संग्रहण
शहर के वार्डों की आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में कचरा संग्रहण करने वाले टिपरों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पर्याप्त वाहन नहीं होने से कई मोहल्लों में समय पर कचरा संग्रहण नहीं हो पाने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को कचरा गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है। समय पर कचरा नहीं उठने पर सड़कों और खाली भूखंडों में कचरा जमा होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती है।


बाहरी चालकों के सामने गलियों तक पहुंचने की चुनौती
कचरा संग्रहण व्यवस्था में चालकों की स्थानीय जानकारी भी महत्वपूर्ण है। बीकानेर के पुराने शहर की गलियां संकरी और घुमावदार हैं। ऐसे में यदि टिपर चालकों को वार्डों के रास्तों और मोहल्लों की पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो उन्हें निर्धारित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
स्थानीय रास्तों से परिचित चालकों की तैनाती और प्रत्येक वार्ड के लिए निर्धारित रूट की स्पष्ट जानकारी इस समस्या को दूर करने में मददगार साबित हो सकती है। इससे यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि वार्ड का कोई हिस्सा कचरा संग्रहण से वंचित न रहे।
दो चक्कर के बाद बैटरी डिस्चार्ज होने का दावा
इलेक्ट्रिक टिपरों की कार्यक्षमता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ वाहन महज दो चक्कर लगाने के बाद ही बैटरी डिस्चार्ज होने की समस्या का सामना करते हैं। यदि ऐसा है, तो वाहनों को दोबारा चार्ज करने में लगने वाला समय कचरा संग्रहण की दैनिक क्षमता को प्रभावित कर सकता है।


नगर निगम को इलेक्ट्रिक टिपरों की बैटरी क्षमता, वास्तविक परिचालन समय, चार्जिंग व्यवस्था और प्रतिदिन पूरे किए जाने वाले चक्करों की समीक्षा करने की जरूरत है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि समस्या बैटरी की क्षमता, वाहनों के रखरखाव या चार्जिंग व्यवस्था में है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती
शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती है। एक ओर पर्याप्त टिपरों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, वहीं दूसरी ओर चालकों को स्थानीय रास्तों की जानकारी देने और इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता के अनुरूप परिचालन व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।
इसके लिए वार्डवार कचरा संग्रहण रूट निर्धारित करने, वाहनों की नियमित निगरानी करने और कचरा उठान से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने जैसे कदम उपयोगी हो सकते हैं।
सवाल यही—आखिर कैसे स्वच्छ बनेगा बीकानेर?
शहर को स्वच्छ रखने के लिए केवल योजनाएं और दावे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। यदि टिपरों की कमी, चालकों की परेशानी और बैटरी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह इन समस्याओं की समीक्षा कर क्या ठोस कदम उठाता है। शहरवासियों को बेहतर सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए संसाधनों की उपलब्धता के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।

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