शिक्षक समस्याओं के समाधान और विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने पर हुआ मंथनशैक्षिक महासंघ के जिला शिक्षक सम्मेलन के पंचम एवं समारोप सत्र में शिक्षकों ने रखे सुझाव






THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के जिला शिक्षक सम्मेलन के अंतर्गत पंचम एवं समारोप सत्र में शिक्षक समस्याओं, शैक्षिक नवाचारों तथा विद्यालयों के समग्र विकास को लेकर सार्थक मंथन हुआ। जिलेभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से रखते हुए उनके व्यावहारिक एवं नियमसम्मत समाधान के साथ नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुझाव एवं अनुभव साझा किए।
इससे पूर्व संगठन के खण्ड अध्यक्ष एवं मंत्रियों के साथ जिला कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक जिलाध्यक्ष दानाराम भादू की अध्यक्षता एवं प्रदेश सचिव रवि आचार्य के सानिध्य में हुई। बैठक में विभिन्न सांगठनिक गतिविधियों एवं आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई तथा प्रस्तावित आयोजनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर संवाद हुआ।
अतिरिक्त जिला मंत्री मोहम्मद फैसल ने बताया कि पंचम सत्र में शिक्षकों ने स्थानांतरण, पदोन्नति, सेवा संबंधी विषयों, विभागीय प्रक्रियाओं एवं विद्यालय संचालन से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को रखा। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति लाभ के लिए आवश्यक कार्रवाई, पे-प्रोटेक्शन रिकवरी को प्रत्याहारित करने, 3808 विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी करने, TET परीक्षा से शिक्षकों को मुक्त करने, बकाया ग्रीष्मावकाश वेतन के लिए वेतन स्थिरीकरण विकल्प खोलने, वाणिज्य एवं सामाजिक विज्ञान सहित शेष विषयों की पदोन्नति के लिए हेड टीचर पद सृजित करने तथा शारीरिक शिक्षकों के पदों के अपग्रेडेशन की मांग रखी गई।
इसी क्रम में यथावत कार्यग्रहण पर पुनर्विचार, पदोन्नत शिक्षकों की पदस्थापन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने, एमडीएम सहित गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का समय पर वितरण सुनिश्चित करने तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अनावश्यक प्रतिनियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग भी रखी गई।
शिक्षकों ने पाठ्यक्रम की समीक्षा, शिक्षकों को अधिकाधिक शिक्षण कार्य में संलग्न रखने, संस्था प्रधानों के अवकाश को ऐच्छिक कर दो शिक्षण दिवस बढ़ाने, कार्य दिवसों में विभिन्न आयोजनों के औचित्य पर विचार करने तथा विद्यालयों से जुड़े निर्णयों में जिला एवं प्रदेश स्तर पर शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
खुले सत्र में शैक्षिक नवाचार एवं शैक्षिक समस्याओं पर आपसी संवाद के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न आयामों पर भी चर्चा हुई। ‘हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ’ एवं ‘प्रभावी प्रार्थना सभा’ के माध्यम से विद्यालयों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति, ‘नशा मुक्त विद्यालय’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा महापुरुषों के विचारों एवं कार्यों से विद्यार्थियों को परिचित कराने की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। संत शिरोमणि रविदास जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर भी विशेष चर्चा हुई। खुले सत्र का संचालन मोहम्मद रमजान ने किया।
इस अवसर पर सुरेश खेशवानी, राज शेखर हर्ष, रवि आचार्य, मीरा वर्मा, बबीता वर्मा, तेजस्विनी आचार्य, पूनमचंद गोदारा, सूर्यप्रकाश, अनिल गुजर, जगदीश मंडा, अलसीराम विश्नोई, मनोज लखेरा, अनूप विश्नोई, मोनिका गौड़, दयाशंकर शर्मा, पूर्णचंद प्रजापत, श्रीराम खिलेरी, दुर्गाराम सारण, विकास पंवार, बहादुर सिंह, अशोक पवार, मोहम्मद रमजान सहित अनेक शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समारोप सत्र में विद्यालय के प्रति अपनत्व का भाव विकसित करने का आह्वान
समारोप सत्र प्रदेश सचिव रवि आचार्य के मुख्य आतिथ्य, सहायक निदेशक शिक्षा विभाग दिनेश आचार्य के विशिष्ट आतिथ्य एवं जिलाध्यक्ष दानाराम भादू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। संचालन मोहनलाल सीवर ने किया।
मुख्य अतिथि रवि आचार्य ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक एवं विद्यार्थी में विद्यालय के प्रति अपनत्व, गौरव और जिम्मेदारी का भाव विकसित होने से ही विद्यालयों के स्वरूप में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्रबोध विकसित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक संस्कारों के निर्माण में योगदान देने का आह्वान उन्होंने शिक्षकों से किया।
विशिष्ट अतिथि दिनेश आचार्य ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक एवं विभाग के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से विभागीय योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जिलाध्यक्ष दानाराम भादू ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शिक्षक हितों के साथ-साथ शिक्षा एवं शिक्षार्थी हितों को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सामने आए सुझावों एवं समस्याओं को व्यवस्थित रूप से संकलित कर सक्षम स्तर तक पहुंचाया जाएगा तथा उनके समाधान के लिए संगठन प्रभावी प्रयास करेगा।




































