बीकानेर निकाय चुनाव 2026: प्रचार का शोर थमा, अब शुरू हुई ‘खूणा राजनीति’; शिकायतों के लिए हेल्पलाइन जारी

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 अब अपने सबसे निर्णायक दौर में पहुंच गया है। सोमवार शाम 5 बजे चुनाव प्रचार का शोर थम गया। इसके साथ ही रैलियों, सभाओं और बड़े काफिलों पर रोक लग गई है। अब प्रत्याशी सीमित संख्या में समर्थकों के साथ डोर-टू-डोर संपर्क कर सकेंगे।
प्रचार के सार्वजनिक मंच शांत होने के बाद अब वार्डों में अंदरूनी बैठकों और व्यक्तिगत संपर्क का दौर तेज हो गया है। स्थानीय चुनावी भाषा में इसे ‘खूणा राजनीति’ के तौर पर देखा जा रहा है। प्रत्याशी और उनके समर्थक अब उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने अभी तक अपने मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
आखिरी दौर में बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
बीकानेर के वार्डों में मतदान से पहले का समय प्रत्याशियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सार्वजनिक प्रचार बंद होने के बाद नुक्कड़ की बैठकों, मोहल्लों में व्यक्तिगत संपर्क और छोटी बैठकों के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिशें जारी हैं।
इसी दौर में कई वार्डों में वोटों के ध्रुवीकरण और स्थानीय समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रत्याशियों की नजर ऐसे मतदाताओं और प्रभावशाली स्थानीय समूहों पर है, जिनका रुख अंतिम समय में चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
आचार संहिता की निगरानी सख्त
चुनाव को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक नारायण सिंह का कैंप कार्यालय सर्किट हाउस के कमरा नंबर 101 में बनाया गया है।
आदर्श आचार संहिता या चुनाव से संबंधित शिकायत के लिए आमजन 0151-2940095 पर संपर्क कर सकते हैं। वहीं पर्यवेक्षक के लाइजन अधिकारी डॉ. रामकिशोर मेहरा के मोबाइल नंबर 90015-61078 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
प्रथम चरण में नगर निगम बीकानेर के चुनाव के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से विभिन्न नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं।
पोस्टर-होर्डिंग हटाने के निर्देश
प्रचार का समय समाप्त होने के बाद शहर में लगाए गए पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाने की कार्रवाई भी की जानी है। प्रशासन और निर्वाचन आयोग की निगरानी के बीच प्रत्याशियों को चुनाव नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब चुनाव प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन वार्डों के भीतर राजनीतिक गतिविधियां और मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क का दौर तेज हो गया है। आने वाला समय तय करेगा कि आखिरी दौर की यह ‘खूणा राजनीति’ कितने वार्डों के समीकरण बदलती है।





































