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मध्यमवर्गी परिवारों पर दोहरी मार, भवनों में टेंट-लाइट की ‘अनिवार्य बुकिंग’ से बिगड़ रहा शादियों का बजट

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:-शहर में शादियों का सीजन परवान पर है, लेकिन खुशियों के इस माहौल में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अपनी लाडली की शादी का बजट संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ जहां हाल ही में संपन्न हुए ‘पुष्करणा सावे’ के दौरान विभिन्न संस्थाओं और भामाशाहों के सहयोग से कन्याओं के पिताओं को बड़ी आर्थिक राहत मिली थी, वहीं दूसरी ओर शहर के मैरिज गार्डन और भवनों की मनमानी ने आम आदमी का बजट बिगाड़!


​सिंडिकेट का खेल: ‘हमारा भवन, तो टेंट-लाइट भी हमारी ही’
​शहर के लगभग 90% निजी भवनों और मैरिज गार्डन्स में अब एक नया अघोषित नियम लागू हो चुका है। भवन की बुकिंग के साथ ही टेंट और लाइट की बुकिंग भी उन्हीं के व्यवसायियों से करवानी अनिवार्य होती है। यदि किसी परिवार का अपना परिचित टेंट व्यवसायी कम दामों में काम करने को तैयार हो, तो उसकी भी भवन में बुकिंग नही हो सकती। इस “सिंडिकेट” की वजह से आम आदमी को अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
​लागत कम, वसूली ज्यादा
​हैरानी की बात तो यह है कि कई भवनों में टेंट और लाइट का सामान स्थाई रूप से कमरों में ही पड़ा रहता है। व्यवसायियों को न तो सामान लाने-ले जाने का किराया (ट्रांसपोर्टेशन) देना पड़ता है और न ही ज्यादा मजदूरी, फिर भी उपभोक्ताओं से भारी भरकम राशि वसूली जा रही है।
​सरकारी अनुदान वाले भवनों पर भी सवाल
​शहर में कई ऐसे भवन और सामुदायिक केंद्र हैं जिन्हें सरकारी अनुदान भी मिला हुआ है। इसके बावजूद वहां भी आम आदमी को राहत देने के बजाय टेंट और लाइट के नाम पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
​बदलाव की दरकार
​बीकानेर के प्रबुद्ध जनों और सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि आने वाले समय में इस ‘हठधर्मिता’ पर विचार होना चाहिए। यदि विवाह स्थलों पर टेंट और लाइट चुनने की आजादी परिवार को मिले, तो शादियों के खर्च में कमी आ सकती है। प्रशासन और समाज को मिलकर इस आर्थिक मार से आम आदमी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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