बीकानेर में कांग्रेस नेताओं पर एक्शन से गरमाई सियासत: पहले कोंग्रेस पार्षद विश्नोई और अब पूर्व मेयर,पार्षद को मिला नोटिस






THE BIKANER NEWS:;बीकानेर। शहर में कांग्रेस नेताओं को लगातार मिल रहे नोटिसों के बाद स्थानीय सियासत गरमा गई है। बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा कांग्रेसी पार्षद मनोज विश्नोई को अंतिम नोटिस थमाने के बाद, अब पूर्व मेयर और कांग्रेसी पार्षद मकसूद अहमद को भी एक पुराने मामले में नोटिस मिलने की जानकारी सामने आ रही है बैक-टू-बैक हो रही इस कार्रवाई को कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की बौखलाहट और हार का डर करार दिया है।
पूर्व मेयर मकसूद अहमद को पुराने मामले में नोटिस
कोटगेट थाना इलाके के एक पुराने मामले को लेकर पूर्व मेयर और वर्तमान में कांग्रेसी पार्षद मकसूद अहमद को पुलिस का नोटिस मिला है। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री बी.डी. कल्ला और मकसूद अहमद के बीच इस मुद्दे को लेकर गहन मंत्रणा चल रही है, वहीं बी.डी. कल्ला इस मामले में पहले भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। फिलहाल इस नोटिस को लेकर मकसूद अहमद का कोई बयान नही आया है
वही विश्नोई को मिले नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कल्ला ने कहा कि भाजपा को अब चुनाव में अपनी हार का डर सता रहा है, जिसके चलते इस तरह की कार्रवाइयां की जा रही हैं।
पार्षद मनोज विश्नोई को BDA का 2 दिन का अल्टीमेटम
इससे ठीक पहले, रानी बाजार स्थित ‘होटल शौर्य 3.0’ के संचालन को लेकर कांग्रेसी पार्षद मनोज विश्नोई को BDA की ओर से अंतिम नोटिस जारी किया गया है। BDA उपायुक्त कुणाल राहड़ के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी इस नोटिस में व्यावसायिक गतिविधियों और भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं।
प्राधिकरण का कहना है कि 9 फरवरी को भी नोटिस देकर दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन 6 महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। BDA ने अब विश्नोई को 2 दिन का अंतिम समय दिया है। यदि सक्षम अधिकारी के समक्ष दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
“हम डरने वाले नहीं हैं”
BDA के इस नोटिस पर पार्षद मनोज विश्नोई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “हम इस तरह के नोटिसों से डरने वाले नहीं हैं। हम नियमों के मुताबिक अपना पक्ष रखेंगे और नोटिस का कानूनी तरीके से जवाब देंगे।”
बीकानेर में एक के बाद एक कांग्रेस नेताओं पर कसते इस शिकंजे ने प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच तनातनी और बढ़ने के आसार हैं।





































