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पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में चौकाने वाली जानकारी आई सामने,प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल!

THE BIKANER NEWS:-​​बीकानेर: कोटा के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले के बाद बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया था। यहां प्रसव के बाद कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने की घटना ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लापरवाही का आलम यह रहा कि किडनी खराब होने के साथ-साथ दो प्रसूताओं की आंखों की रोशनी भी चली गई।

​जिसके बाद चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के 6 विशेषज्ञों की एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

​मीडिया रिपोर्ट के अनुसा OT में संक्रमण और गंदगी:
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन थियेटर (OT) के आसपास भारी गंदगी और कबाड़ फैला हुआ था। ओटी को संक्रमण मुक्त रखने के लिए जरूरी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा था और वहां फ्यूमिगेशन (Fumigation) भी नहीं हुआ था।

​एंटीबायोटिक भी हुए बेअसर: जिन दो प्रसूताओं में संक्रमण पाया गया (जिनमें एक की सामान्य और दूसरी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी), उन्हें दिए गए एंटीबायोटिक दवाओं से भी संक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
​अलग आईसीयू (ICU) का अभाव: गायनी (स्त्री रोग) विभाग के पास अपना अलग आईसीयू नहीं है। अस्पताल में मेडिसिन विभाग के पास केवल एक ही आईसीयू है, जहां एक साथ कई मरीजों को रखा जाता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक रहता है।

​80 साल पुरानी जर्जर इमारत:
जोधपुर की जांच कमेटी ने अस्पताल के 80 साल पुराने भवन की मरम्मत करवाने की भी सख्त सिफारिश की है।
​किडनी फेल होने के मुख्य कारण:
कमेटी ने 4 में से 2 प्रसूताओं की किडनी फेल होने के पीछे अस्पताल में फैले संक्रमण को ही मुख्य कारण माना है। वहीं, अन्य 2 प्रसूताओं के मामले में इसका कारण अधिक रक्तस्राव (Bleeding), बीपी (BP) बढ़ना और मिर्गी को बताया गया है।


​दवा और आईवी फ्लूइड की रिपोर्ट आना अभी बाकी
​जोधपुर मेडिकल कॉलेज की एक्सपर्ट कमेटी के बीकानेर पहुंचने से पहले ही ड्रग कंट्रोलर की टीम ने आईसीयू और ओटी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और आईवी फ्लूइड (IV Fluid) के सैंपल ले लिए थे। इनकी जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। इस रिपोर्ट के आने के बाद इसे भी जोधपुर कमेटी की मुख्य रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

​स्वास्थ्य मंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट:
कमेटी ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। चिकित्सा मंत्री के बीकानेर दौरे के दौरान प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर भी उन्हें इस रिपोर्ट के तथ्यों से अवगत कराया गया है।
​इस घटना ने प्रदेश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, विशेषकर मातृ-शिशु कल्याण इकाइयों की स्थिति पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह है कि रिपोर्ट के बाद अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार क्या सख्त कदम उठाती है।

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