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बीकानेरवासियों के लिए खुशखबरी,जल्द ही 12 प्रमुख रूटों पर दौड़ेंगी 75 हाई-टेक इलेक्ट्रिक सिटी बसें

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। शहर की परिवहन व्यवस्था अब और भी सुगम, सुरक्षित और आरामदायक होने जा रही है। लंबे समय से ऑटो रिक्शा और निजी टैक्सियों पर निर्भर शहरवासियों के लिए नगर निगम और परिवहन विभाग का बहुप्रतीक्षित ‘सिटी बस प्रोजेक्ट’ जल्द ही धरातल पर उतरने वाला है। न्यायालय में डिपो के मामले के कारण हुई देरी के बाद अब जून तक शहर के 12 प्रमुख रूटों पर 75 वातानुकूलित (AC) इलेक्ट्रिक सिटी बसें दौड़नी शुरू हो जाएंगी।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें एक नज़र में:

  • कुल बसें: प्रोजेक्ट के तहत कुल 125 ई-बसों का खाका तैयार है। पहले चरण में 75 बसें आएंगी और शेष 50 बसें दूसरे चरण में जोड़ी जाएंगी।
  • बसों का आकार: शहर के संकरे रास्तों (जैसे- जूनागढ़, कोटगेट, फड़बाज़ार) को ध्यान में रखते हुए बसों की लंबाई 9 मीटर रखी गई है ताकि वे आसानी से मुड़ सकें।
  • प्रमुख रूट: ये बसें शहर के चारों कोनों— देशनोक, एयरपोर्ट, खारा इंडस्ट्रियल, इंजीनियरिंग कॉलेज और रायसर तक का सफर तय करेंगी।
  • संचालन: संचालन और रखरखाव का जिम्मा 10 वर्षों के लिए एक मोबिलिटी कंपनी को दिया गया है। बस का ड्राइवर कंपनी का होगा, जबकि कंडक्टर की भर्ती नगर निगम करेगा।
  • किराया और भुगतान: अधिकृत किराया अभी जारी नहीं हुआ है। यात्री नकद के अलावा UPI और स्मार्ट कार्ड (डिजिटल पेमेंट) के ज़रिए भी टिकट ले सकेंगे।

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हाई-टेक फीचर्स:

  • भीषण गर्मी से राहत: सभी बसें पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) होंगी, जिससे बीकानेर की 48 डिग्री वाली गर्मी में भी यात्रियों को ठंडक का अहसास होगा।
  • स्मार्ट डोर सिस्टम: बसों में हाइड्रोलिक गेट होंगे। जब तक गेट पूरी तरह बंद नहीं होंगे, बस स्टार्ट नहीं होगी। इससे पायदान पर लटकने से होने वाले हादसों पर 100% लगाम लगेगी।
  • सीसीटीवी और पैनिक बटन: हर बस में 3 कैमरे लगे होंगे जिनकी लाइव फीड कंट्रोल रूम में देखी जा सकेगी। आपात स्थिति या छेड़छाड़ होने पर यात्री ‘पैनिक बटन’ दबा सकेंगे, जिससे तुरंत पुलिस और कंट्रोल रूम को अलर्ट मिल जाएगा।
  • महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा: * बस की क्षमता 40 यात्रियों (25 बैठने + 15 खड़े होने) की होगी।
    • ​महिलाओं के लिए 4 सीटें विशेष रूप से ‘गुलाबी रंग’ की रिज़र्व होंगी।
    • ​दिव्यांगों के लिए ‘लो-फ्लोर रैंप’ की सुविधा होगी ताकि वे व्हीलचेयर के साथ सीधे बस में प्रवेश कर सकें।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिपो:

एमजीएसयू (MGSU) के सामने बसों का डिपो तैयार किया जा रहा है। बसों को चार्ज करने के लिए 10 हाई-पावर डीसी चार्जर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जयपुर रोड और गंगाशहर रोड पर भी चार्जिंग पॉइंट बनेंगे।

  • चार्जिंग टाइम: एक बस मात्र 45 से 60 मिनट में फुल चार्ज हो जाएगी।
  • रेंज: फुल चार्ज होने पर बस 180 से 200 किलोमीटर का सफर तय कर सकेगी, जो दिनभर के फेरों के लिए पर्याप्त है।

पर्यावरण को फायदा और ऑटो चालकों की चिंता का समाधान:

विशेषज्ञों के अनुसार, 75 ई-बसों के चलने से शहर में सालाना करीब 5000 टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जिससे प्रदूषण में भारी कमी आएगी।

​वहीं, सिटी बस सेवा शुरू होने से ऑटो चालकों में जो चिंता थी, निगम अधिकारियों ने उसे भी दूर किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिटी बसें मुख्य रूटों पर चलेंगी, जबकि ऑटो रिक्शा अंदरूनी गलियों से मुख्य सड़क (बस स्टैंड) तक सवारियां लाने-ले जाने का काम करेंगे, जिससे ऑटो चालकों का रोज़गार भी सुरक्षित रहेगा।

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