वैभव सूर्यवंशी का तूफान: महज 11 गेंदों में जड़ा दुनिया का सबसे तेज लिस्ट-A अर्धशतक, ध्वस्त किए कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड

THE BIKANER NEWS:-दांबुला: भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले जा रहे ट्राई नेशन वनडे सीरीज के खिताबी मुकाबले में भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया है। दांबुला के रंगिरी इंटरनेशनल स्टेडियम में सूर्यवंशी ने लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी है। उन्होंने यह मुकाम केवल 11 गेंदों में हासिल किया।

मैच का हाल और तूफानी शुरुआत
फाइनल मुकाबले में श्रीलंका-ए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन भारतीय ओपनर्स ने इस फैसले को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत-ए की तरफ से प्रियांश आर्या और वैभव सूर्यवंशी ने पारी की शुरुआत की और पहले ही ओवर से ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए।
सूर्यवंशी ने दूसरे ओवर में ही छक्कों-चौकों की झड़ी लगाते हुए अकेले 26 रन बटोर लिए। इसके बाद पारी के चौथे ओवर में उन्होंने दो छक्के और एक चौका लगाते हुए अपना ऐतिहासिक अर्धशतक पूरा कर लिया।
उसके बाद भी ताबड़तोड़ बलेबाजी करते हुए मात्र 29 गेंदों में 94 रन बनाकर आउट हो गए
सूर्यवंशी ने तोड़े ये बड़े रिकॉर्ड
अपनी इस तूफानी पारी में सूर्यवंशी ने 11 गेंदों में 5 छक्कों की मदद से फिफ्टी पूरी की और कई पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया:
- सबसे तेज लिस्ट-A फिफ्टी: यह अब लिस्ट-ए क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक है। इससे पहले यह रिकॉर्ड श्रीलंका के कौशल्या वीररत्ने के नाम दर्ज था, जिन्होंने साल 2005 में रगामा क्रिकेट क्लब के लिए खेलते हुए यह कीर्तिमान बनाया था।
- सबसे तेज भारतीय का रिकॉर्ड: सूर्यवंशी ने भारत की तरफ से सबसे तेज अर्धशतक के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। इसी साल सरफराज खान ने मुंबई के लिए खेलते हुए पंजाब के खिलाफ 15 गेंदों में फिफ्टी जड़ी थी। उससे पहले यह रिकॉर्ड अभिजीत काले (16 गेंद, 1995) के नाम था।
- (वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड अभी भी दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स के नाम है, जिन्होंने 2015 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 16 गेंदों में यह कारनामा किया था।)
आलोचकों को दिया करारा जवाब
खास बात यह है कि फाइनल से पहले वैभव सूर्यवंशी की फॉर्म को लेकर काफी सवाल उठाए जा रहे थे। इस सीरीज में श्रीलंका-ए के खिलाफ पिछले 2 मैचों में वे मात्र 35 रन ही बना सके थे, जबकि अफगानिस्तान-ए के खिलाफ 2 मैचों में उनके बल्ले से 85 रन निकले थे। टूर्नामेंट में मिले कई जीवनदानों का वे फायदा नहीं उठा पा रहे थे। लेकिन सबसे अहम खिताबी मुकाबले में पहली ही गेंद से आक्रामक रुख अपनाकर उन्होंने अपने सभी आलोचकों को करारा जवाब दिया है और अपना नाम इतिहास के पन्नों में सबसे ऊपर दर्ज करा लिया है।





































