ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में कांग्रेस अध्यक्ष के स्वागत में नहीं दिखे कई बड़े चेहरे!,शहर के ‘पाटो’ पर चर्चाओं का दौर जारी:पढ़े खास खबर

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर। कोंग्रेस के बड़े और शीर्ष नेताओं ने कई महीनों की मशक्कत और जांच पड़ताल के बाद आखिर कोंग्रेस शहर और देहात अध्य्क्ष पद के नामो का ऐलान कर दिया है जिसमे मदन गोपाल मेघवाल को शहरी और बिशनाराम सियाग को देहात की ज़िमेदारी सौपी गयी है। उसके बाद से स्वागत और बधाई का सिलसिला भी जारी है साथ ही शहर के पाटो पर और राजनीति गलियारो में विरोध की सुगबुहाट की चर्चाओं को भी बल मिल रहा है ।

जिसका उदाहरण कांग्रेस शहर अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में देखने को भी मिला! आपको बता दे कि उस स्वागत कार्यक्रम में कई शीर्ष और प्रभावशाली नेताओं की गैरमौजूदगी ने शहर की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को गर्म कर दिया है।
ब्राह्मण बाहुल्य इलाक़े में आयोजित इस कार्यक्रम में अरुण व्यास मौजूद रहते थे बाकी एक दो को छोड़ कर कांग्रेस के कई बड़े और सक्रिय ब्राह्मण चेहरे और उनके समर्थक दिखाई नहीं दिए, जिससे अंदरूनी नाराजगी या मतभेद की अटकलें तेज हो गई हैं। क्यो की कुछ दिन पूर्व कोंग्रेस के कुछ पधाधिकारियो ने सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता भी बुलाई थी जो शहर अध्य्क्ष के चयन के विरोध में बताई जा रही थी,हालांकि किसी कारणवश उस प्रेस वार्ता को कैंसिल भी करना पड़ा था
हमेशा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले और अपनी दबंग छवि के लिए पहचाने जाने वाले आनंद कुमार जोशी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। इसी तरह युवा और सशक्त नेता अनिल कल्ला भी शामिल नही होने की जानकारी मिल रही है, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति ने कार्यकर्ताओं को भी हैरत में डाल दिया है।
इतना ही नहीं, शहर में कांग्रेस संगठन का मजबूत आधार रखने वाले कई अन्य वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम से दूरी बनाए रहे। कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे संजय आचार्य, मनोज किराड़ू और ऋषि व्यास जैसे दावेदार भी कार्यक्रम में नजर नहीं आए ऐसी जानकारी मिल रही है। हालांकि ऐसा हो सकता है कि ये सब किसी निजी कारणों से कार्यक्रम में नही जा पाए हो लेकिन शहर के पाटो पर चर्चाओं में बाते जरूर होती है
दूसरी ओर स्वागत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति को लेकर भी शहर के पाटो पर “कुछ खास माहौल” नही था कि चर्चा करते सुना गया।
इन सभी परिस्थितियों और चर्चाओं को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कांग्रेस के भीतर कोई बड़ा अंदरूनी विरोध, नाराजगी या शक्ति संघर्ष चल रहा है, जिसकी झलक इस कार्यक्रम में दिखाई दी?
हालांकि किसी ने कांग्रेस के स्थानीय नेताओं से नही जाने की वजह पूछी भी नही है और ना ही उन्होंने ने इस पर कोई आधिकारिक बयान भी नहीं दिया है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष और असमंजस का माहौल पाटो पर साफ तौर पर चर्चाओं में नजर आ रहा है।
चर्चाओं में एक कोंग्रेस के स्पोटर को ये भी कहते सुना गया कि जब अध्य्क्ष पद के चयन प्रक्रिया चल रही थी तो एक स्लोगन दिया गया था कि “जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी” लेकिन उनकी इस चयन प्रक्रिया में ये बात फिट नही हो रही।
खेर ये बीकानेर के पाटो की चर्चाएं तो होती रहती है! देखते है अब नए अध्य्क्ष के सानिध्य में शहर में क्या कुछ नया होने वाला है । मिलते है किसी नई चर्चाओं के साथ




































