नहरबंदी का कहर: कागजों में ‘एक दिन छोड़कर आपूर्ति’, आचार्य घाटी में 25 दिन से नल सूखे, टैंकरों के भरोसे प्यासे लोग


THE BIKANER NEWS:-बीकानेर।शहर में चल रही नहरबंदी के बीच जलदाय विभाग के ‘एक दिन छोड़कर एक दिन’ जलापूर्ति के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विभाग के दावों और आदेशों की पोल शहर के आचार्य घाटी क्षेत्र में खुलती नजर आ रही है। यहां आचार्य घाटी के नीचे, पुराना मंडल अध्यक्ष की गली और उसके आसपास के घरों में रहने वाले लोग पिछले 25 दिनों से पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं।
मुकेश आचार्य ने बयां किया मोहल्ले का दर्द, टैंकर मंगवाने को मजबूर लोग
क्षेत्रवासी मुकेश आचार्य ने जानकारी देते हुए बताया कि एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ पानी का यह भारी संकट, दोनों ने मिलकर आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। उन्होंने बताया कि पुराना मंडल अध्यक्ष की गली और आसपास के क्षेत्र में 25 दिन से नलों में पानी नहीं आया है, जिससे लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से चरमरा गई है। मजबूरन मोहल्ले वालों को अपनी जेब ढीली कर महंगे दामों पर निजी पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए रोज टैंकर का खर्च उठाना भारी पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र में त्राहि-त्राहि मची हुई है।
अधिकारियों ने मूंदी आंखें, नहीं हो रही सुनवाई
मुकेश आचार्य और अन्य स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस विकट जल संकट को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से कई बार गुहार लगाई है। लगातार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अधिकारियों की इस घोर अनदेखी और लापरवाही के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
लोगों ने उठाया सवाल: क्या यही है व्यवस्था?
मोहल्ले के लोगों ने रोष जताते हुए सवाल उठाया है कि जब विभाग ने नहरबंदी के दौरान एक दिन छोड़कर एक दिन पानी देने की व्यवस्था तय की थी, तो फिर उनके इलाके के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? 25 दिनों तक जलापूर्ति ठप रहना स्पष्ट रूप से विभाग की विफलता को दर्शाता है।






































