जैसलमेर ओरण भूमि को कंपनियों को विक्रय पर स्वर्णनगरी में किसानों का एक माह से धरना जारी

16 अक्टूबर को भव्य महा आक्रोश रैली का आयोजन होगा

प्रशासन की लिए पुन बनेगी चुनौती
जैसलमेर (कैलाश बिस्सा)
स्वर्णनगरी में 16 सितंबर से निरंतर किसानों द्वारा ओरण गोचर भूमि को राजस्व एकड़ भूमि को दर्ज करने की मांग को लेकर एक माह से धरना जारी है किंतु राज्य सरकार द्वारा कड़े फैसले नहीं लेना हठधर्मिता के चलते पुन राज्य सरकार को कुमकरणीय नींद से जागृति को लेकर 16 अक्टूबर को साधु संतो के नेतृत्व में पुन भव्य आक्रोश रैली का आयोजन होगा
निःसंदेह प्रशासन को चुनौती का सामना करना पड़ेगा
आखिरकार राज्य सरकार को जैसलमेर की ओरण गोचर भूमि को कंपनियों को विक्रय करने पर आम जन आक्रोश व्याप्त है
इसमें संदेह नहीं शहर के लोक प्रिय विधायक द्वारा सत्तर हजार बीघाभूमि को ओरण गोचर सम्मिलित का प्रस्ताव भेज चुके है जबकि शिव विधायक का कहना वे जयपुर में धूल चाट रही है क्या इस राज्य में निर्वाचित प्रतिनिधित्व का महत्व शून्य हो गया है?
स्थिति स्पष्ट है राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों द्वारा शिविरों का बहिष्कार किया गया
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में छात्र छात्राओं द्वारा एक दिन का शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया
राज्य सरकार को सद्बुद्धि के लिए स्वर्णनगरी के दशहरे चौक पर पुष्करणा ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ किया किया गया
भगवान लक्ष्मी नाथ मंदिर के द्वार पर अर्जी लगाई गई
केंद्रीय मंत्री शेखावत के समक्ष सर्किट हाउस नंगे पैर पहुंचे वहां भी ओरण टीम को तिरस्कार का सामना पड़ा
विपक्ष द्वारा बाड़मेर जैसलमेर सांसद बेनीवाल पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव जिला अध्यक्ष उमेद सिंह तंवर द्वारा भी समर्थन किया गया
बीती रात दुर्ग की तलहटी पर स्थिति रामदेव मंदिर में ओरण टीम द्वारा ओरण कथा भजन संध्या का आयोजन किया गया
पूर्व में 26 सितंबर को महा आक्रोश रैली का आयोजन भी हुआ
आखिरकार पुन ओरण टीम को 16 अक्टूबर को पुन महा आक्रोश रैली का आयोजन साधु संतो के नेतृत्व में स्वर्णनगरी की आवाम द्वारा पुन सरकार को कुमकरणीय नींद से जागृत करने की लिए महा आक्रोश रैली क्योजन होने जा रहा है
इस रैली में भाग लेने के लिए 15 अक्टूबर की खुले आसमान के नीचे ओरण टीम के साथ शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी भी व्यतीत करेंगे और महा रैली में भाग लेंगे
अनेकों सवालिया निशान उठ खड़े हुए राज्य सरकार इस प्रकार का व्यवहार क्यों अपना रही है यह भविष्य के गर्त में छुपा हुआ है देखना है मांगे स्वीकार करती है या नहीं अन्यथा इन्हें दीपावली भी इन्हीं सड़कों की किनारे मनानी पड़ेगी




































