बीकानेर: जश्न में भंग डालती बदहाल सड़कें; उड़ती धूल ने बिगाड़ा ‘मेकअप का बजट’, गंदे पानी ने रोका रास्ता!अफसरों की नाराजगी और दावे ‘हवा हवाई’!

THE BIKANER NEWS:- बीकानेर, बीकानेर में शादियों के रंग में भंग डाल रही जर्जर सड़कें धूल से सने बाराती और गड्ढों में हिचकोले खाती खुशियां आपको बता दे अभी शादियों का सीजन चल रहा है और बीकानेर शहर में नवंबर दिसंबर और जनवरी में सैकड़ों शादियों होने वाली है साथ ही शहर में कल होने वाले सबसे बड़े धार्मिक उत्सव रामजानकी विवाह से पहले भी प्रशासन की ‘नींद’ नहीं खुली,

शादियों का सीजन पूरे शबाब पर है। शहर में हर तरफ शहनाइयों की गूंज और बैंड-बाजे का शोर है, लेकिन बीकानेर में जश्न के इस माहौल पर यहां की बदहाल सड़कें पानी फेर रही हैं। शहर की टूटी-फूटी सड़कें, गड्ढों से उड़ती धूल और जगह-जगह पसरा गंदा पानी न सिर्फ आम राहगीरों, बल्कि अब बारातियों के लिए भी बड़ी मुसीबत बन गया है। हालात ऐसे हैं कि सज-धज कर निकले बारातियों का उत्साह सड़क पर कदम रखते ही धूल में मिल रहा है।
धूल में मिला हजारों का मेकअप
सबसे ज्यादा परेशानी शादी समारोहों में शामिल होने वाली महिलाओं और युवतियों को उठानी पड़ रही है। वे घंटों मेहनत कर तैयार होती हैं, महंगे पार्लर से मेकअप करवाती हैं ताकि शादी में सबसे अलग दिख सकें। लेकिन जैसे ही वे घर से निकलकर समारोह स्थल या बारात में शामिल होने के लिए सड़क पर आती हैं, वाहनों से उड़ती धूल का गुबार उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर देता है।
एक स्थानीय निवासी ने तंज कसते हुए कहा,”सड़कों की हालत ने महिलाओं के मेकअप का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। पार्लर से निकलकर वे कार्यक्रम स्थल तक पहुंचती हैं, तब तक चेहरे पर मेकअप की जगह धूल की परत चढ़ जाती है।
बारातियों के महंगे शेरवानी और सूट भी धूल से सन रहे हैं।”
खास कर के शहर के अंदरूनी इलाकों—नत्थूसर, जस्सूसर, गोगागेट और कोटगेट—में इन दिनों हर दूसरे घर में शहनाई गूंज रही है। मायरा, खिरोडा और खोला भराई जैसी रस्मों के लिए जब परिवार और रिश्तेदार पैदल निकलते हैं, तो टूटी सड़कें और उड़ती धूल उनका स्वागत करती हैं।
खासकर, पुष्करणा स्कूल से नत्थूसर गेट की तरफ जाने वाले रास्ते पर एम.एम. स्कूल और बाबा रामदेव जी मंदिर के पास हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहाँ नालियां जाम होने से गंदा पानी सड़क पर जमा है, जिससे पैदल निकलना दूभर हो गया है। कई बार तो सजे-धजे बारातियों और महिलाओं को कीचड़ से बचने के लिए रास्ता तक बदलना पड़ता है।
बारातियों का नाचना भी जोखिम भरा
शादियों में बारातियों का उत्साह भी सड़कों के गड्ढों ने ठंडा कर दिया है। नत्थूसर गेट से ओझा सत्संग भवन जाने वाली सड़क पिछले 4 साल से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। बीच-बीच में लीपापोती (मरम्मत) होती है, लेकिन महीने भर में सड़क फिर टूट जाती है। सड़कों के बीच खुदी सीवर लाइन और गहरे गड्ढों के कारण बारात में नाचना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। कई बार बाराती गड्ढों में पैर पड़ने से गिरते-गिरते बचते हैं। धूल का आलम यह है कि विवाह स्थल पर पहुंचते ही महिलाओं को दोबारा मेकअप करना पड़ता है और कपड़े झाड़ने पड़ते हैं।
रामजानकी विवाह कल, प्रशासन अब भी खामोश
कल शहर में सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन ‘रामजानकी विवाह’ होने जा रहा है, जिसमें भगवान राम की बारात निकलेगी और सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं खुली है। जिस रास्ते से भगवान की बारात निकलेगी, वहां के हालात सुधारने की कोई सुध नहीं ली गई है।
विधायक के वादे और अफसरों की नाराजगी ‘हवा-हवाई
हालांकि, विधायक व्यास और प्रसाशन ने पहले दिवाली से पहले फिर दिवाली के बाद और अब पुष्करणा सावे (फरवरी) से पहले सड़कें सुधारने की बात कही थी, लेकिन सवाल यह है कि अभी नवंबर-दिसंबर और जनवरी की शादियों का क्या होगा? क्या जनता यूं ही परेशान होती रहेगी?
कुछ महीने पहले जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त ने सड़कों की हालत पर नाराजगी जताई थी, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी। वादे और आदेश सब धूल-मिट्टी में मिल गए हैं।
पॉश कॉलोनियां भी अछूती नहीं सिर्फ परकोटा ही नहीं, पवनपुरी, सुदर्शन नगर, पटेल नगर, शास्त्री नगर और रोडवेज बस स्टैंड के सामने जैसे इलाकों में भी सड़कों के बड़े हिस्से क्षतिग्रस्त हैं। पॉश कॉलोनियां हों या कच्ची बस्तियां—हर जगह उड़ती धूल स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गई है। राहगीरों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायतें हो रही हैं।
शहरवासी अब सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर उन्हें इस नरक जैसे हालात से मुक्ति कब मिलेगी?





































