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प्रशासन की अनदेखी से इस कॉलोनी वासी बदतर नारकीय जीवन जीने को मजबूर

THE BIKANER NEWS. जैसलमेर( कैलाश बिस्सा) स्वर्णनगरी की आवंटित सावल कॉलोनी हो या राजस्थान आवासन मंडल कॉलोनी इन कॉलोनी निवासी बदतर नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे है मूलभूत सुविधाओं से वंचित निवासियों ने नगर परिषद से जिला प्रशासन से राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया जा चुका है
किंतु किसी के कानो में जू तक नहीं रेंग पा रही है आखिर इन कॉलोनी वाशियो को भविष्य में प्रशासन के समक्ष आन्दोलन करने को मजबूर कर रहा है
आखिर सब्र की एक सीमा होती है प्रजातंत्र देश है अब्राहिम लिंकन ने स्पष्ट रूप से परिभाषा उल्लेखित है प्रजातंत्र जनता का जनता के लिए जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाया जाता है
किंतु स्वर्णनगरी के आला अफसरों को क्या फर्क पड़ता है इसमें संदेह नहीं वक्त रहते उपरोक कॉलोनियों वाशियो की समस्या का समाधान नहीं होता है तो बेशक कुंभकरणीय नींद में सोए इन आला अफसरों की नींद निश्चित रूप से इन्हें स्वयं के कर्तव्यों से जागरूक कर देगी
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के परिणामस्वरूप ये आला अफसर फल फूल रहे है किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने का दुष्परिणाम स्थानीय आवंटित कॉलोनी वासियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है
राज्य सरकार त्वरित प्रभाव से समय उपरोक्त समाधान के कदम उठाए नहीं तो वो दिन दूर नहीं महिलाओं सहित आम कॉलोनी वासियों को सड़क पर आंदोलन होने को मजबूर होना पड़ेगा
किसी ने सत्य कहा है वो इस शहर के लिए निश्चित रूप से कहा जा सकता है रोम जल रहा था नीरू चैन से बंशी बजा रहा था

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