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देश लोकतंत्र है राजतंत्र नहीं सरकारों की तानाशाही के चलते सड़कों पर आन्दोलन धरना प्रदर्शन करने को मजबूर क्यों?

स्वर्णनगरी कैलाश बिस्सा)

स्वर्णनगरी में विगत दिनों गजरूप सागर से जिला कलेक्टर कार्यालय तक 5 किलोमीटर पैदल यात्रा कर सैकड़ों की तादाद में ग्रामीणों ने ओरण गोचर भूमि को संरक्षित के लिए विगत 10 वर्षों से मांग की जा रही है विगत सरकार और वर्तमान सरकारों की तानाशाही के चलते जैसलमेर में जिला कलेक्टर परिसर के बाहर सैकड़ों की तादाद में मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन को मजबूर होना पड़ा क्या ये मांगे जायज नहीं है
बेशकीमती भूमि को कंपनियों को एलॉट मेट करना खेजड़ी वृक्षों की बेशुमार कटाई करना आम जन को आहत कर रहा है

धरना प्रदर्शन की मांग में उपरोक्त भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में सम्मिलित करे किंतु सरकारों की तानाशाही मनमानी के चलते यह चिंगारी आगामी बीकानेर में 19 सितंबर को जिला कलेक्टर परिसर के समक्ष प्रदर्शन होगा सवाल उठता है राज्य सरकार क्यों कुंभकरणीय नींद में सो रही है ज्ञातव्य रहे यह देश प्रजातंत्र है अब्राहम लिंकन स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है जनता द्वारा जनता के लिए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा शासन को जनतंत्र लोकतंत्र प्रजातंत्र कहते है शायद यह सरकार भूल चुकी है जनता की जायज मांग को त्वरित प्रभाव से मांग स्वीकार करे यह चिंगारी को आग के गोले के रूप में न बदल जाए आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा?

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