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बीकानेर:-धार्मिक स्थल की आड़ में जमीन पर कब्जा अब बर्दाश्त नही, लोक अदालत ने खारिज की याचिका,क्या टूटेंगे अवैध कब्जे!

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर
बीकानेर की स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवा) ने 10 मार्च 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए सरकारी जमीन पर अतिक्रमणकारियों की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थल की आड़ में बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तो क्या अब टूटेंगे उस जमीन पर बने मंदिर की आड़ में अवैध कब्जे

आपको बता दे कि जैसलमेर रोड पर महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पास स्थित बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) की सरकारी जमीन (खसरा नंबर 8/5, नथानियां) पर ‘माता मंदिर’ के नाम पर अतिक्रमण हो रखा था ,इस जमीन की अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। अतिक्रमणकारियों ने यहां अवैध रूप से कमरे, शौचालय, टीन शेड, छप्पर और गौशाला जैसी संरचनाएं खड़ी कर ली थीं।
​प्राधिकरण की कार्रवाई और न्यायालय में चुनौती
बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी करने के बावजूद जब कब्जा नहीं हटाया गया, तो अनिल कुमार पुरोहित और रमेश कुमार पुरोहित ने लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने राजस्थान सरकार, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और BDA आयुक्त के खिलाफ परिवाद (संख्या 729/2025) दायर कर दिया।

बीकानेर विकास प्राधिकरण की ओर से वकील राजेश राजपुरोहित ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। उन्होंने जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज पेश किए और अदालत के समक्ष प्रमुख तर्क रखे:
​यह भूमि पूर्ण रूप से प्राधिकरण के अधीन है।
​संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक होने के कारण यह मामला लोक अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर है।
​यह विवाद जनोपयोगी सेवा से संबंधित नहीं है।
​सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुसार, असली मालिक के खिलाफ अतिक्रमणकारी को कोई कानूनी राहत नहीं दी जा सकती।
​अदालत का फैसला
सभी पक्षों और कानूनी पहलुओं को सुनने के बाद, अदालत ने याचिकाकर्ताओं के दावे को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि एक करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्ति और जनोपयोगी सेवा का विषय न होने के कारण यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
​इस फैसले से बीकानेर विकास प्राधिकरण को बड़ी राहत मिली है और शहर में अतिक्रमण करने वालों को एक सख्त संदेश गया है।

अब देखना यह है कि अदालत के निर्णय के बाद आगे क्या होगा, टूटेंगे अवैध कब्जे या फिर….

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