खेजड़ी बचाओ महा आंदोलन,सरकार के प्रतिनिधियों ने लिखित आदेश का दिया आश्वाशन ,विधायक व्यास ने किया दावा,बयान पर संत दिखे नाराज़

THE BIKANER NEWS:-बीकानेर:बीकानेर में चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ महा आंदोलन’ गुरुवार को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। इसे पर्यावरण प्रेमियों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। भारी दबाव और संतों के अडिग रवैये के बाद, सरकार झुकती नजर आ रही है और आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग मानने को तैयार होती दिख रही है।

1. सबसे बड़ी खबर: कानून बनने तक कटाई पर रोक का लिखित आदेश
आंदोलन स्थल पर पहुंचे मंत्री केके विश्नोई ने पर्यावरण प्रेमियों को लिखित आदेश का भरोसा दिया है।
इस लिखित आदेश में यह साफ तौर पर उल्लेख किया जाएगा कि: “जब तक खेजड़ी संरक्षण के लिए कड़ा कानून नहीं बन जाता, तब तक क्षेत्र में खेजड़ी की कटाई नहीं होगी।”
2. लिखित आदेश मिलते ही खत्म हो सकता है अनशन
सरकार की ओर से इस ठोस आश्वासन के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि आज ही पर्यावरण प्रेमियों का अनशन खत्म हो सकता है। हालांकि, आंदोलन की अगुवाई कर रही संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही उनके हाथ में सरकार का लिखित आदेश आएगा, उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा और विधिवत रूप से अनशन समाप्ति की घोषणा की जाएगी।
इससे पहले गुरुवार सुबह जब मंत्री केके विश्नोई और जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई अनशन स्थल पहुंचे, तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। मंत्री ने मौखिक आश्वासन देकर अनशन तुड़वाने की कोशिश की, लेकिन संत सरजूदास और अन्य संतों ने दो-टूक कह दिया था कि “इधर-उधर की बात न करें, लिखित में दें, तभी मानेंगे।”
4. विधायक के बयान पर हुआ था हंगामा
माहौल उस वक्त और गरमा गया था जब विधायक पब्बाराम विश्नोई ने अनशन तोड़ने की अपील करते हुए एक विवादित बयान दिया, जिसे लोगों ने धमकी के रूप में लिया। इसके बाद भारी हंगामा हुआ और लोगों ने विधायक को बैठा दिया।
5. इसी सत्र में कानून बनने के आसार
इस बीच, विधायक जेठानंद व्यास ने भी जैसलमेर से आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री से मिलकर कड़े कानून की मांग की गई है और पूरी संभावना है कि इसी विधानसभा सत्र में कठोर कानून बना दिया जाएगा।
निष्कर्ष:
खेजड़ी बचाने के लिए शुरू हुआ यह महा आंदोलन अब अपनी तार्किक परिणति की ओर बढ़ रहा है। संतों और पर्यावरण प्रेमियों की एकजुटता ने सरकार को लिखित आश्वासन देने पर मजबूर कर दिया है, जिसे इस आंदोलन की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।




































