|

पुष्करणा सावा स्पेशल:सजावट की चकाचौंध के बीच सड़कों की मरम्मत के नाम पर महज ‘खानापूर्ति’,

THE BIKANER NEWS:- बीकानेर।देश भर में शादियों की शहनाइयां गूंज रही हैं, बीकानेर भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन छोटी काशी के लिए 10 फरवरी का दिन बेहद खास है, क्योंकि इस दिन ऐतिहासिक ‘पुष्करणा सामूहिक सावे’ का आयोजन होने जा रहा है। इस महाकुंभ को देखने के लिए देश-विदेश से मेहमान बीकानेर पहुँचते हैं। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि शहर को चमकाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन ‘द बीकानेर न्यूज़’ की टीम ने जब परकोटे की जमीनी हकीकत टटोली, तो दावों की पोल खुलती नजर आई।
​सजावट पर पूरा जोर, सड़को पर’लीपापोती’
सावे की तैयारियों का जायजा लेने जब हमारी टीम परकोटे की गलियों में उतरी, तो तस्वीर साफ हो गई। प्रशासन का पूरा जोर सिर्फ गेट और सर्किलों को चमकाने पर है,चौकों में लाइट और टेंट से शामियाना बना कर दीवावली पर सजावट पर जो कमी थी उसकी कसर पूरी होती दिखाई दे रही है बस, जबकि जिन रास्तों से बारातें गुजरनी हैं, वहां केवल खानापूर्ति की गई है।


​इन इलाकों में अभी भी जगह जगह खड्डे पड़े है।

टीम ने पाया कि तेलीवाड़ा से मोहता चौक, हर्षों का चौक, बारह गुवाड़, नत्थूसर गेट और गोकुल सर्किल की तरफ जाने वाली मुख्य सड़कों पर अभी भी कई छोटे छोटे खड्डे पड़े है,सड़क पर जिनमे कुछ पर राहत की मिट्टी डाल कर खानापूर्ति की गई है जब कि बाकी जस के तस पड़े है,आप उन सड़को से निकलोगे तो लगेगा ही नही की यहां पर पेच वर्क या खड्डों को भरा गया है।

​सीवर लाइन का दर्द: गलियों में सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़कें भी अभी तक टूटी पड़ी हैं जिनके ऊपर से बाइक निकले तो गिरने का अंदेशा रहता है,
​ओझा सत्संग भवन मार्ग:आधा बना, आधा टूटा
नत्थूसर गेट से ओझा सत्संग भवन की तरफ जाने वाली सड़क का मामला और भी चौंकाने वाला है। यहाँ आधी सड़क तो मजबूत बना दी गई है, लेकिन सरकारी डिस्पेंसरी और श्मशान भूमि के पास का हिस्सा पिछले कई सालों से बदहाल है। यहाँ कोई काम नहीं हुआ है, जबकि ओझा सत्संग भवन में सावे के दौरान कई विवाह समारोह आयोजित होने हैं। वहां पास में सरकारी डिस्पेंसरी और श्मशान भूमि भी है लेकिन….
​गलियों में कैसे निकलेगी बारात?
शहर के मुख्य चौराहों और सर्किलों पर दीपावली की कमी पूरी करते हुए शानदार सजावट जरूर की गई है, लेकिन उन तंग गलियों और घरों के आगे की सुध नहीं ली गई जहाँ से बारातें निकलनी हैं या आनी हैं। नालियों का निर्माण कुछ जगहों पर हुआ है, लेकिन सड़कों की हालत मेहमानों के स्वागत में फीकी साबित हो सकती है। पुष्करणा स्कूल से नत्थूसर गेट की तरह जाने वाली सड़क पर भी पेचवर्क के नाम पर मात्र औपचारिकता ही कि गयी है,वहां रामदेव जी मंदिर के पास कुछ जगह तो पेचवर्क किया है कुछ को वैसे ही छोड़ दिया गया है,एम.एम. स्कूल के आगे तो अभी भी हालत चिंताजनक है, नालिया भी जाम पड़ी है,नत्थूसर गेट से पहले भी सड़क के बीच छोटा कटाव है जिसमे दिन भर पानी भरा रहता है उसको भी भरना उचित नही समझा गया, उसके अलावा शहर की कई गलियों में तो जायजा भी नही लिया गया है कि वहां सावे पर साफ सफाई और सड़कों का पेचवर्क करना है या नही।
​निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, पुष्करणा सावे को लेकर प्रशासन द्वारा किए गए दावे कागजों में तो शत-प्रतिशत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चकाचौंध तो है, पर रास्तों में छोटे छोटे गड्ढे भी हैं। अब देखना यह होगा कि सावे के दिन ट्रैफिक व्यवस्था इन टूटी सड़कों के बीच कैसे संभल पाती है। क्यो की शहर की सबसे बड़ी समस्या यह भी है,गलियों में जब दो बाराते आमने सामने आ जाती है तो घण्टो निकलना मुश्किल हो जाता है। आपकी की नजर में कैसी है सावे पर व्यवस्थाएं हमारे फेसबुक पेज पर कमेंट्स में जरूर बताये।

Show More

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button