जर्जर भवन और पुरानी इमारतें दे रही है हादसों को न्योता

जैसलमेर (कैलाश बिस्सा)झालावाड़ में मौत की वजह बना जर्जर अवस्था में बने शिक्षा के मंदिर, मासूमो को मौत की कीमत देकर चुकानी पड़ी।

आगामी समय वर्षा ऋतु के चलते स्वर्णनगरी में राष्ट्रीय धरोहर जर्जर अवस्था के भवनों के संबंध में संबंधित प्रशासन ने ठोस कदम नही उठाए है। सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री कर कर्तव्य पालन से बचा नहीं जा सकता।
शहर में वर्षों पूर्व स्वर्णनगरी में निरंतर वर्षा ने कोहराम मचाया। परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय धरोहर दीवान सालम सिंह की हवेली (मोती महल) का एक भाग मध्य सड़क पर ध्वस्त हो चुका था।
आज तक इस राष्ट्रीय धरोहर की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह है।
संबंधित स्वामित्व द्वारा भी संबंधित प्रशासन से लेकर उच्च स्तर पर ज्ञापन दिए जा चुके है।संबंधित प्रशासन किस भयावह का मंजर का इंतजार कर रहा है।
गौरतलब है इसी पथ से सैकड़ों मूक जानवर और स्वर्णनगरी वाशिंदों का आवागमन का रास्ता है। न जाने किस समय इस हवेली का विशाल प्रस्तर जाने अनजाने में मौत की वजह बनेगा। आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा वहीं दूसरी तरफ शहर के जर्जर जीर्ण शीर्ण हालत में भवनों को संबंधित प्रशासन ने नोटिस देकर इतिश्री कर चुका है।
आलम यह है पुरातत्व विभाग द्वारा दुर्ग निवासियों द्वारा भवनों की मरम्मत के अनुमति नहीं देना,यह कहा तक न्याय संगत है।
संबंधित प्रशासन द्वारा सख्ती रवैए से रुख नहीं अपनाया गया तो परिणाम स्वरूप प्राकृतिक प्रकोप के चलते अनेक इस प्रकार के भवन दम तोड़ते नजर आयेगे और आस पास के रहवासी भी इसकी गिरफ्त में आने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
आखिर संबंधित प्रशासन ने कौनसे एहतियाद तौर पर क्या कदम उठाए गए है यह एक सवालिया निशान है।
किसी भी प्रकार की भयावह मौत का मंजर हो तो संबंधित प्रशासन स्वयं को सुरक्षित नहीं कर पाएगा।इस तरह की उदासीनता से स्वर्णनगरी में राष्ट्रीय धरोहर और जर्जर जीर्ण शीर्ण भवन प्राकृतिक प्रकोप के चलते सैकड़ों काल का ग्रास में समा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी।



































